आज से तीन मार्च तक लग गया होलाष्टक, होलाष्टक शब्द का अर्थ है होली के आठ दिन
वाराणसी (रणभेरी): भारतीय सनातन परम्परा में होली के 8 दिन पूर्व होलाष्टक शुरू हो जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के 8 दिनों में मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं। जबकि धार्मिक अनुष्ठान यथावत् चलते रहते हैं। प्रख्यात ज्योर्तिविद पं. विमल जैन के मुताबिक धार्मिक मान्यता के अनुसार होली से 8 दिन पहले का समय होलाष्टक कहलाता है।
इस बार होलाष्टक की शुरुआत मंगलवार से हो गई जो कि 3 मार्च मंगलवार तक रहेगा। बताया कि होलाष्टक के चलते वैवाहिक मुहुर्त, वधू प्रवेश, द्विरागमन, मुंडन, नामकरण, अन्नप्राशन, देवप्रतिष्ठ, नवगृह निर्माण व प्रवेश आदि समस्त कार्य वर्जित रहेंगे। होलाष्टक शब्द होली और अष्टक दो शब्दों से मिल कर बना है। जिसका अर्थ होता है होली के आठ दिन। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि तक होलाष्टक रहता है।
अष्टमी तिथि से शुरू होने के कारण इसे होलाष्टक कहा जाता है। अष्टमी तिथि के दिन चन्द्रमा,नवमी तिथि के दिन सूर्य, दशमी तिथि के दिन शनि, अकादशी तिथि के दिन शुक्र, द्वादशी तिथि के दिन वृहस्पति त्रयोदशी तिथि के दिन बुध, चतुर्दशी तिथि तिथि के दिन मंगल तथा पूर्णिमा तिथि के दिन राहु ग्रह उग्र स्वरूप माने गये हैं। ग्रहों की उग्रता के फलस्वरूप व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता में कमी आ जाती है।
जिसके कारण व्यक्ति उचित-अनुचित, संकल्प-विकल्प की स्थिति में सही निर्णय लेने में अपने को असमर्थ महसूस करता है। कई बार उसके निर्णय एसे हो जाते हैं कि वह अनुकूल नहीं होते। इसके चलते उसे लाभ के स्थान पर हानि मिलती है। जिनकी कुंडली में नीच राशि के चन्द्रमा और वृश्चिक राशि के जातक या चन्द्रमा छठें या आठवें भाव मेंं हैं उन्हें इन दिनों विशेष सावधानी व सर्तकता रखनी चाहिए।
