मेडल लेने से किया इंकार, जर्जर खेल मैदान को लेकर उठाई आवाज
वाराणसी (रणभेरी): शहर स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सोमवार को अंत:संकाय युवा महोत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान उस समय असहज स्थिति बन गई, जब लगभग 20 खिलाड़ियों ने मंच से सम्मान ग्रहण करने से इंकार कर दिया। खिलाड़ियों ने विश्वविद्यालय के खेल मैदान की बदहाल स्थिति को लेकर नाराजगी जताई और सभागार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में महापौर अशोक तिवारी मौजूद थे। हाल ही में आयोजित खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जा रहे थे। कुछ खिलाड़ियों को सम्मानित किए जाने के बाद अचानक माहौल बदल गया और कई प्रतिभागियों ने पुरस्कार लेने से मना कर दिया।

“सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है”
विरोध कर रहे खिलाड़ियों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल औपचारिकता निभा रहा है, जबकि खेल मैदान की हालत बेहद खराब है। उनका आरोप है कि मैदान में जगह-जगह मलबा, ईंट और कचरा पड़ा है, जिससे अभ्यास और प्रतियोगिता कराना मुश्किल हो गया है।कबड्डी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले एक छात्र ने बताया कि उन्होंने उप-कप्तान के रूप में टीम का प्रतिनिधित्व किया, साथ ही अन्य खेलों में भी स्थान हासिल किया, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में मेडल लेना उचित नहीं समझा। उनका कहना था कि पहले खेल मैदान को दुरुस्त किया जाए।
संबोधन के बाद बढ़ी हलचल
कार्यक्रम विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में आयोजित था। मुख्य अतिथि के संबोधन के बाद जब कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा मंच से बोल रहे थे, तभी कुछ खिलाड़ी सभागार में पहुंचे और अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस दौरान हल्की नोकझोंक भी हुई।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि खेल मैदान की स्थिति सुधारने के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे। करीब दस मिनट की बातचीत के बाद खिलाड़ी बाहर निकल आए और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन जारी रखा।

“प्रतियोगिताएं नाममात्र की”
कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से खेल सुविधाओं में गिरावट आई है। उनका आरोप है कि मैदान की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं किया जा रहा, जिससे खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। गोला फेंक और अन्य प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों ने भी मैदान में मलबा डाले जाने की शिकायत की।खिलाड़ियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सम्मान का अपमान करना नहीं, बल्कि खेल सुविधाओं के प्रति प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
