- 40 किमी सफर कर 78 की उम्र में भी सेवा में समर्पित, रोज मरीजों का करते हैं इलाज
- डॉ. शर्मा आवास पर रोजाना दो घंटा चलाते हैं नि:शुल्क क्लीनिक सेवा
- मेडिकल के साथ भी कई धार्मिक पुस्तकों की भी की रचना
- गोल्ड मेडल समेत न जाने कितने सम्मान व पुरस्कारों से नवाजे गए, कहा – मरीजों की सेवा करना ही मेरा धर्म
राधेश्याम कमल
वाराणसी (रणभेरी)। कहते हैं कि चिकित्सक साक्षात भगवान होते हैं। भगवान के बाद अगर कोई है तो वह चिकित्सक ही होते हैं जो मरीजों को जीवनदान देते हैं। जीवन व मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे मरीजों को नया जीवन प्रदान करना किसी भी चिकित्सक का परम कर्तव्य है। बनारस के डॉ. ओमप्रकाश शर्मा इन्हीं चिकित्सकों में से एक है जो सेवा निवृत्त होने के बाद भी मरीजों की अनवरत सेवा करने में तल्लीन हैं।
78 वर्षीय अत्यन्त मिलनसार प्रो. डॉ. ओमप्रकाश शर्मा रोजाना बनारस से लगभग 40 किमी की दूरी तय करके मरीजों का इलाज करने के लिए दूसरे जिला चंदौली जाते हैं। शाम को वहां से अपने आवास राजेन्द्र विहार कालोनी नेवादा लौटने के बाद डॉ. शर्मा रोजाना दो घंटे घर पर ही सभी के लिए नि:शुल्क क्लीनिक चलाते हैं। वह हर बीमारियों का इलाज करते हैं। कहते हैं कि मरीजों की सेवा करना ही मेरा धर्म है। मरीजों की सेवा करके मुझे हृदय से बहुत ही खुशी मिलती है।
डॉ. ओमप्रकाश शर्मा बनारस के बांसफाटक मुहल्ले में 14 जुलाई 1947 को जन्मे और उनकी शिक्षा दीक्षा भी यहीं पर हुई। वह महामना पं. मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान से एमबीबीएस, एमडी, पीएचडी की उपाधियां प्राप्त की। वह चिकित्सा विज्ञान संस्थानके रेडियोडायग्रोसिस विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसियेट प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष के रुप में 36 वर्षोें तक स्वास्थ्य सेवा के साथ-साथ अध्ययन, शोध कार्य भी किया। सन 2013 में वह सेवानिवृत्त हुए लेकिन 78 साल की आयु में भी मरीजों की सेवा का कार्य नहीं छूटा।

सन् 2014 में वाराणसी में स्थापित प्रथम प्राइवेट चिकित्सा विज्ञान संस्थान के रेडियोलॉजी विभाग के प्रथम प्रोफेसर व विभागाध्यक्ष के पद पर 2017 तक अपनी सेवाएं अर्पित की। केन्द्र सरकार तथा टाटा कैंसर केन्द्र की ओर से वाराणसी में स्थापित होमी भाभा चिकित्सालय तथा महामना पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान में डॉ. शर्मा को प्रथम रेडियोलॉजिस्ट व विभागाध्यक्ष का पद संभालने का दायित्व डॉ. शर्मा को सन 2019 में मिला। फरवरी 2023 तक उन्होंने अपनी सेवाएं दी। मई 2023 से आज तक वह भारत सरकार द्वारा स्थापित एमसीएच विंग जिला अस्पताल चंदौली में कन्सल्टेंट रेडियोलॉजिस्ट का कार्य कर रहे हैं।
200 से अधिक लेखों का हो चुका है प्रकाशन
प्रो. डी. ओपी शर्मा काशी हिंदू विश्वविद्यालय में सेवा की अवधि में उनके 200 से भी अधिक लेखों का प्रकाशन हो चुका है। देश-विदेश में शोधवाचक और लेखक के रुप में डॉ. शर्मा मेडिकल क्षेत्र में देश के सर्वोच्च सम्मान मेडिकल डिग्री फेलो ऑफ नेशनल अकादमी आफ मेडिकल सांइसेज से 2005-06 में सम्मानित हो चुके हैं। डॉ. पीएल वार्ष्णेय तथा डॉ. केएम राय गोल्ड मेडल ओरेशन एवार्ड से अलकृंत डॉ. शर्मा उत्तर प्रदेश पत्रकार संघ की ओर से काशीरत्न, बनारस रत्न तथा उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान से भी अलंकृत हैं। 62 स्नातकोत्तर रेडियोलाजिस्ट छात्रों नें उनके निर्देशन में शोध कार्य किया है।
देवाधिदेव महादेव, गणेश, हनुमान पर लिखी पुस्तकें
प्रो. डॉ. ओपी शर्मा की तीन धार्मिक कृति भी है। इसमें देवाधिदेव महादेव है जिसकी संरचना शिवपुराण, लिंगपुराण, स्कंद पुराण, विद्वानों से चर्चा, विद्वानों के लेखों पर आधारित डॉ. शर्मा द्वारा संकलित व संपादित अंक है। इसमें शिव के विभिन्न चरित्रों पर प्रकाश डाला गया है। उनकी दूसरी कृति रामसखा हनुमान है जिसमें हनुमान के चरित्र व उनका बल पराक्रम आदि को उजागर किया गया है। इसके बाद उनकी पुस्तक गणपति चरित्र है जिसमें गणेशजी के बारे में उनकी उत्पत्ति से लेकर हर प्रसंगों की व्याख्या की गई है।
