महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर निकली ऐतिहासिक पदयात्रा

महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर निकली ऐतिहासिक पदयात्रा

सैकड़ों साहित्यकार, शिक्षक, छात्र रहे शामिल, साहित्यकारों की प्रसाद आवास पर हुई संगोष्ठी

कहा- प्रसादजी की कृतियां एक अमूल्य धरोहर

वाराणसी (रणभेरी): महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से एक ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा में भारी तादाद में काशी के साहित्यकार, शिक्षक, छात्र और समाज के अन्य प्रबुद्ध जन शामिल थे। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने हरी झंडी दिखा कर पदयात्रा का शुभारंभ किया।

कुलपति ने कहा कि पदयात्रा के माध्यम से प्रसाद की जी कृतियां, साहित्य, उनकी धरोहर को संजोकर आने वाली पीढ़ी को अवगत कराने का एक सशक्त माध्यम साबित होगा। कहा कि पदयात्रा के जरिये प्रसाद का साहित्य आम पाठकों से जुड़ने का भी बहुत ही प्रभावशाली माध्यम बनेगा। पदयात्रा की संयोजक एवं जयशंकर प्रसाद की प्रपौत्री डा. कविता प्रसाद ने कहा कि यह पहली बार पदयात्रा निकाली जा रही है। अब हर बार प्रसादजी की जयंती पर पदयात्रा निकाली जायेग। इस पदयात्रा के माध्यम से हिंदी के छात्रों के साथ आम पाठकों को भी जोड़ा जायेगा।

विधान परिषद सदस्य धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि पदयात्रा का आयोजन हिंदी साहित्य के लिए मील की पत्थर साबित होगा। यह एक एतिहासिक क्षण है जिसके लिए नगर के पत्रकार, साहित्यकार व प्रबुद्ध जन इसके साक्षी हैं। शहर के वरिष्ठ कवि व साहित्यकार गणेश गंभीर ने कहा कि आमजन को यह हिंदी साहित्य से जोड़ने का नायाब तरीका है। प्रसादजी की कृतियां एक अमूल्य धरोहर है। इसे संजो कर रखने की जरुरत है।

साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने कहा कि इस तरह की पदयात्रा से हिंदी मातृभाषा को लेकर आज की पीढ़ी में जागरुकता बढ़ेगी। डॉ. दयानिधि मिश्र ने कहा कि प्रसाद की धरोहर को संजो कर रखने की जरुरत है। पदयात्रा में प्रमुख रुप से डॉ. कवीन्द्रनारायण, प्रो. श्रद्धानंद, डॉ. अत्रि भारद्वाज, वरिष्ठ साहित्यकार व कवि गणेश गंभीर, समेत काफी संख्या में साहित्यकार व पत्रकार तथा शिक्षक शामिल रहे। पदयात्रा के प्रसाद आवास पर पहुंचने के बाद वहां साहित्यकारों की संगोष्ठी हुई।

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