छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे थे इमरान मसूद, पुलिस ने करीब 6 घंटे बाद छोड़ा
(रणभेरी): दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में शुक्रवार देर रात उस समय हलचल मच गई, जब सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद दीवार फांदकर परिसर में दाखिल हो गए। विश्वविद्यालय के गेट पर भारी पुलिस बल तैनात था। ऐसे में मसूद ने पीछे की ओर से करीब 6-7 फीट ऊंची दीवार फांदकर अंदर जाने का फैसला किया। यहां उन्होंने छात्रसंघ की बहाली की मांग को लेकर धरना और भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से मुलाकात की। हालांकि, बाहर निकलते समय पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। शनिवार सुबह करीब 5:30 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया।
दीवार फांदकर छात्रों के बीच पहुंचे इमरान मसूद
घटनाक्रम के कई वीडियो सामने आए हैं। इनमें इमरान मसूद दीवार पर चढ़ते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग उन्हें दीवार चढ़ने में मदद करते दिखाई देते हैं। परिसर में पहुंचने के बाद कांग्रेस सांसद जमीन पर बैठकर छात्रों से बातचीत करते नजर आए। उन्होंने भूख हड़ताल कर रहे विद्यार्थियों का हालचाल जाना और उनके आंदोलन को समर्थन दिया। इस दौरान सपा एमएलसी शहनवाज खान भी मौजूद रहे।
‘छात्रों की जान कीमती, प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए’
छात्रों से बातचीत के दौरान इमरान मसूद ने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य हैं और उनकी जान कीमती है। छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं, ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के संवैधानिक अधिकारों को दबाने की कोशिश की जा रही है। मसूद ने यह भी कहा कि राहुल गांधी छात्रों की लड़ाई मजबूती से लड़ रहे हैं और वह विद्यार्थियों के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हैं।

‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ के पोस्टरों पर क्या बोले?
जामिया परिसर में ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ जैसे नारों और पोस्टरों को लेकर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह भारत को तोड़ने वाले किसी भी नारे का समर्थन नहीं करते। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पोस्टर लगाकर छात्रों के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस की तैनाती पर उठाए सवाल, वीसी से करेंगे बात
इमरान मसूद ने छात्रों से मिलने के लिए परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों से मिलना कोई गुनाह नहीं है। वह विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रशासन से बात करेंगे और छात्रसंघ की बहाली समेत विद्यार्थियों की मांगों को पूरा कराने का प्रयास करेंगे।
‘सामने के गेट से जाते तो पुलिस रोक देती’
हिरासत से रिहा होने के बाद इमरान मसूद ने दैनिक भास्कर को बताया कि उन्हें अंदेशा था कि मुख्य गेट से जाने पर पुलिस उन्हें अंदर नहीं जाने देगी। इसी वजह से उन्होंने पीछे की ओर से दीवार फांदकर परिसर में प्रवेश किया। छात्रों से मुलाकात के बाद जब वह गेट से बाहर निकले तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने पहुंचा दिया। मसूद के मुताबिक, करीब छह घंटे बाद शनिवार सुबह 5:30 बजे उन्हें रिहा किया गया।
12 अक्टूबर से धरना और भूख हड़ताल कर रहे छात्र
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ की बहाली और अपने अधिकारों की मांग को लेकर विद्यार्थी 12 अक्टूबर से धरना दे रहे हैं। आंदोलन में शामिल कुछ छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। छात्रों से मुलाकात करने पहुंचे इमरान मसूद ने विश्वविद्यालय प्रशासन से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
