वृंदावन में 5 महीने बाद प्रेमानंद महाराज ने की पदयात्रा, भक्तों ने लगाए ‘राधे-राधे’ के जयकारे

वृंदावन में 5 महीने बाद प्रेमानंद महाराज ने की पदयात्रा, भक्तों ने लगाए ‘राधे-राधे’ के जयकारे

(रणभेरी): संत प्रेमानंद महाराज शुक्रवार सुबह करीब पांच महीने के अंतराल के बाद एक बार फिर पदयात्रा करते नजर आए। अपने नए आश्रम से केली कुंज आश्रम जाते समय वाराह घाट तिराहे पर उन्होंने गाड़ी से उतरकर पैदल चलना शुरू कर दिया। महाराज को अपने बीच देखकर सड़क के दोनों ओर खड़े भक्त भावुक हो उठे। इस दौरान पूरा रास्ता ‘राधे-राधे’ और ‘श्री हरिवंश’ के जयघोष से गूंजता रहा।

केली कुंज आश्रम पहुंचने पर प्रेमानंद महाराज ने सबसे पहले राधारानी की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु हित गोविंद शरण महाराज के दर्शन किए। आश्रम में लगभग आधे घंटे बिताने के बाद वह वापस यमुना बिहार कुंज आश्रम के लिए रवाना हो गए।

स्वास्थ्य कारणों से रोक दी गई थी पदयात्रा

प्रेमानंद महाराज की नियमित पदयात्रा 17 मई से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। उस समय उनके शिष्यों ने बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इसी वजह से उन्होंने भक्तों से एकांत में होने वाली मुलाकातें भी बंद कर दी थीं। महाराज की दोनों किडनियां खराब हैं और उन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उनकी दिनचर्या में बदलाव किया गया था।

वृंदावन में 5 महीने बाद प्रेमानंद महाराज ने की पदयात्रा, भक्तों ने लगाए ‘राधे-राधे’ के जयकारे

इस दौरान महाराज ने एक वीडियो संदेश के जरिए भक्तों को धैर्य रखने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि भक्त उनकी चिंता न करें। मुलाकात हो या न हो, उनका प्रेम सभी के प्रति बना रहेगा। उन्होंने भक्तों को अपने आध्यात्मिक उत्थान की चिंता छोड़कर विश्वास बनाए रखने का संदेश भी दिया था।

हालांकि, पदयात्रा बंद होने के करीब दस दिन बाद, 27 मई को महाराज ने फिर से पैदल चलकर भक्तों को दर्शन दिए थे। इसके बाद उनकी पदयात्रा दोबारा नियमित रूप से शुरू नहीं हुई।

शिष्य की मौत के बाद दूसरी बार पहुंचे केली कुंज

केली कुंज आश्रम से जुड़ी एक दुखद घटना के बाद प्रेमानंद महाराज की यहां आवाजाही भी चर्चा में रही। 25 सितंबर को उनकी शिष्या रसिक दुलारी ने केली कुंज ट्रस्ट की इमारत की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। इस घटना के बाद महाराज 8 अक्टूबर को पहली बार केली कुंज आश्रम पहुंचे थे। उस दिन उन्होंने पैदल चलकर भक्तों को दर्शन दिए थे और करीब 15 मिनट तक आश्रम में ठहरे थे। इसके बाद वह बेलवन स्थित लक्ष्मीजी मंदिर के नजदीक बने यमुना बिहार कुंज आश्रम लौट गए थे। शुक्रवार को दोबारा केली कुंज पहुंचने पर महाराज ने इस बार लगभग आधे घंटे तक आश्रम में समय बिताया और पूजा-अर्चना के बाद वापस लौट गए।

नए आश्रम में रह रहे हैं प्रेमानंद महाराज

श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट की ओर से यमुना बिहार कुंज नाम से नया आश्रम बनवाया गया है। 18 मई के बाद से प्रेमानंद महाराज इसी आश्रम में रह रहे हैं। यह आश्रम मथुरा जिले की मांट तहसील में जहांगीरपुर गांव के पास यमुना किनारे स्थित है। यहां से बेलवन के लक्ष्मीजी मंदिर की दूरी लगभग एक किलोमीटर बताई जाती है।

वृंदावन में 5 महीने बाद प्रेमानंद महाराज ने की पदयात्रा, भक्तों ने लगाए ‘राधे-राधे’ के जयकारे

आश्रम परिसर में दो बड़े हॉल बनाए गए हैं, जहां सत्संग और राधारानी की सेवा से जुड़ी गतिविधियां होती हैं। महाराज के उपचार की व्यवस्था भी परिसर में की गई है। इसके लिए एक कंटेनर में डायलिसिस मशीन स्थापित की गई है, जहां डॉक्टर उनकी जरूरत के अनुसार डायलिसिस करते हैं।

पहले तड़के निकलते थे पदयात्रा पर

पहले प्रेमानंद महाराज नियमित रूप से तड़के करीब तीन बजे श्रीराधा केली कुंज आश्रम से पदयात्रा शुरू करते थे। वहां से लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर वह सुनरख खादर स्थित सौभरी वन पहुंचते थे। स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते इस नियमित क्रम पर विराम लग गया था। शुक्रवार को गाड़ी से उतरकर पैदल केली कुंज आश्रम पहुंचने का उनका दृश्य देखकर भक्तों में उत्साह और भावुकता का माहौल नजर आया। लंबे अंतराल के बाद हुई इस पदयात्रा ने वृंदावन में मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।

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