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बुधवार 15-अगस्त-18
हे राम ! योगी जी का यह कैसा काम...



वाराणसी | सनातन धर्म में जिन वस्तुओं को पवित्र माना जाता था और उन्हें सम्मान देते थें उन हर वस्तुओं को हिंदू धर्म में भगवान का दर्जा दिया गया। गाय को भी हिन्दू धर्म में सबसे पवित्र पशु माना जाता है। वेदों में गाय को माता का दर्जा दिया गया और माता को तो सभी पुजनीय मानते ही है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति जो हिन्दू धर्म से हो वह गौवंश को अपनी आस्था से जोड़ कर देखता है, यही कारण रहा कि अब तक देश के कई इलाकों में गोकशी या तस्करी के शक में कई अल्पसंख्यक भीड़ के गुस्से का(मॉब लिंचिंग) शिकार बन गए।

सबसे बड़ी बात यह है कि भारत में हिंदुत्वादी संगठनों के लोग और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गौवंश तस्करी के खिलाफ हमेशा मुखर रहें।

रणभेरी आज एक ऐसे व्यक्ति को बेनकाब करने जा रही है जो धर्म की नगरी काशी में प्रमुख समाजसेवी व गौसेवक का चोला ओढ़ कर आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के गोद में बैठा है और भाजपा के शीर्ष नेताओं क़ा खास बनकर हिंदू आस्था को रौंदते हुए गौ तस्करी करता और करवाता है। जी हां हम बात कर रहे हैं सूर्यकांत जालान उर्फ कानू बाबू की जो काशी जीवदया विस्तारिणी के रामेश्वर मधुबन सहित कई गौशालाओं का प्रबंधक/संचालक है। कहने को तो यह पूर्वांचल का प्रमुख व्यवसाई और आरएसएस का स्वयंसेवक है। मगर इसी पद प्रतिष्ठा की आड़ में यह भेड़ की खाल में भेड़िया बन जनता,समाज और संघ को धोखा देकर गौ तस्करी को अंजाम देता आ रहा है ।

न न चांैकिए मत! यह हम नही कह रहे हैं यह तो वाराणसी के जंसा थाने के पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज है। पुलिस रिकार्ड के अनुसार वर्ष २०१३ जुलाई अ०स० ९१/१३ व ८७/१३ धारा ३/५A/८ गोवध निवारण अधिनियम ११ पशुक्रूरता अधिनियम व ४१९,२९५A,१५३A,३४ आईपीसी का यह मुलजिम सूर्यकांत जालान, समाज की नजरों में बेहद इज्जतदार और रसूख वाला इंसान है। मगर इसके घर की दीवारें गौवंश के लाशों से निकलती हुईं सिसकियों की अनकही दास्तान बयां करती हैं। तो यूं कहें कि इसके घर की रोटियां गौवंश के खून से सनी हुई होती हैं तो कोई अतिश्योक्ति न होगा।

मगर इस कथित गौ तस्कर का बाहरी आवरण ऐसा है कि इसके चंगुल और मायाजाल में संघ सहित भाजपा के कई बड़े नेता गौ तस्करी से प्राप्तधन पर ऐशो आराम और सुख सुविधा का भोग कर रहे हैं। इस आव भगत और खातिरदारी के बदलें में यही लोग सूर्यकांत जालान की रहनुमाई करते हैं यही कारण रहा कि गौ तस्करी के आरोप के बाद भी वर्तमान योगी सरकार ने इसे गौ सेवा आयोग का सदस्य बना दिया। यह तो वही हुआ जैसे बिल्ली को चूहे की रखवाली, कुकर्मी को इज्ज़त की रखवाली, चोर को धन की रखवाली, बलात्कारी को महिला के तन की रखवाली और भ्रष्टाचारी को भ्रष्टाचार निर्मूलन कमेटी का सदस्य बना दिया जाए।

आइये बताते हैं कि गो सेवा के नाम पर कैसे होती है गो तस्करी

पण्डित मदन मोहन मालवीय जी सन्त झावर दत्त द्वारा १९३५ में छोड़ दिये निराश्रित गायों के देखभाल और आसरा के लिए काशी जीव दया विस्तारणी बनाई गई जिसमें कई नागरिकों द्वारा धन,जमीन ईत्यादि देकर इस संस्था को मूर्तरूप दिया गया। वर्तमान में सूर्यकांत जालान इस संस्था का पदाधिकारी है जिसने स्थानीय लोगों की बजाय ऐसे लोगों को संस्था का सदस्य बनाया है जो संस्था के कार्यों में बहुत रुचि नही लेते।

होता यह है कि जब गाय दूध देना बन्द कर देती है या कोई ऐसी गाय जिसकी देखभाल करने वाला कोई न तो उसे लोग इस गौशाला में भेज देते हैं। यही नही चन्दौली,बनारस व आस-पास के जनपदों में पशु तस्करों द्वारा जब भी गाय,बैल,बछड़े पकड़े जाते हैं तो उसे पुलिस द्वारा इसी गौशाला में भेज दिया जाता है। यहीं से शुरू होता है असली खेल। सूत्र बताते हैं कि गौशाला में आये गौवंश को वाहनों में भरकर पहले नौगढ़ देवशिला स्थित गौशाला पहुँचाया जाता है। अगर रास्ते में कोई चेकिंग या पूछताछ होती है तो कह दिया जाता है कि रामेश्वर गौशाला से दूसरे गौशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। फिर उसके बाद गौवंश को नौगढ़ से बिहार स्तिथ गौशाला भेजा जाता है। वहां भी चेकिंग या पूछताछ में यही जवाब दिया जाता है। बिहार के बॉर्डर पर पहँुचने के बाद गौवंश को बंगाल बॉर्डर में दाखिल करा दिया जाता है जिसके बाद उधर गोवंश ले जाने में कोई दिक्कत नही होती। वहां से सीधे-सीधे गोवंश को कत्लखानों में पहुँचा दिया जाता है जहाँ उन्हें मारने के बाद मांस,हड्डी,खाल निकाल कर बंगाल,आसाम और बंग्लादेश तक सप्लाई किया जाता है।होता यह है कि जब गाय दूध देना बन्द कर देती है या कोई ऐसी गाय जिसकी देखभाल करने वाला कोई न तो उसे लोग इस गौशाला में भेज देते हैं। यही नही चन्दौली,बनारस व आस-पास के जनपदों में पशु तस्करों द्वारा जब भी गाय,बैल,बछड़े पकड़े जाते हैं तो उसे पुलिस द्वारा इसी गौशाला में भेज दिया जाता है। यहीं से शुरू होता है असली खेल। सूत्र बताते हैं कि गौशाला में आये गौवंश को वाहनों में भरकर पहले नौगढ़ देवशिला स्थित गौशाला पहुँचाया जाता है। अगर रास्ते में कोई चेकिंग या पूछताछ होती है तो कह दिया जाता है कि रामेश्वर गौशाला से दूसरे गौशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। फिर उसके बाद गौवंश को नौगढ़ से बिहार स्तिथ गौशाला भेजा जाता है। वहां भी चेकिंग या पूछताछ में यही जवाब दिया जाता है। बिहार के बॉर्डर पर पहँुचने के बाद गौवंश को बंगाल बॉर्डर में दाखिल करा दिया जाता है जिसके बाद उधर गोवंश ले जाने में कोई दिक्कत नही होती। वहां से सीधे-सीधे गोवंश को कत्लखानों में पहुँचा दिया जाता है जहाँ उन्हें मारने के बाद मांस,हड्डी,खाल निकाल कर बंगाल,आसाम और बंग्लादेश तक सप्लाई किया जाता है।होता यह है कि जब गाय दूध देना बन्द कर देती है या कोई ऐसी गाय जिसकी देखभाल करने वाला कोई न तो उसे लोग इस गौशाला में भेज देते हैं। यही नही चन्दौली,बनारस व आस-पास के जनपदों में पशु तस्करों द्वारा जब भी गाय,बैल,बछड़े पकड़े जाते हैं तो उसे पुलिस द्वारा इसी गौशाला में भेज दिया जाता है। यहीं से शुरू होता है असली खेल। सूत्र बताते हैं कि गौशाला में आये गौवंश को वाहनों में भरकर पहले नौगढ़ देवशिला स्थित गौशाला पहुँचाया जाता है। अगर रास्ते में कोई चेकिंग या पूछताछ होती है तो कह दिया जाता है कि रामेश्वर गौशाला से दूसरे गौशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। फिर उसके बाद गौवंश को नौगढ़ से बिहार स्तिथ गौशाला भेजा जाता है। वहां भी चेकिंग या पूछताछ में यही जवाब दिया जाता है। बिहार के बॉर्डर पर पहँुचने के बाद गौवंश को बंगाल बॉर्डर में दाखिल करा दिया जाता है जिसके बाद उधर गोवंश ले जाने में कोई दिक्कत नही होती। वहां से सीधे-सीधे गोवंश को कत्लखानों में पहुँचा दिया जाता है जहाँ उन्हें मारने के बाद मांस,हड्डी,खाल निकाल कर बंगाल,आसाम और बंग्लादेश तक सप्लाई किया जाता है।


क्यों होती है गौ तस्करी?

दरअसल बाजार में लोग सामान्य दूध देने वाली गाय बीस से पच्चीस हजार रूपए में खरीदते बेचते हैं। वहीं असक्त बीमार या दूध न देने वाली गाय या गौवंश पांच से दस हजार में मिल जाती है। जिसे पशु तस्कर खरीदकर बंगाल के कसाईयो को अस्सी से नब्बे हजार तक मे बेच देते हैं। और जब यही गाय गौशाला में कोई दान कर देता है या पुलिस, तस्करों से पकड़ कर यहाँ सुपुर्द कर जाती है तो सूर्यकांत जालान के द्वारा रखे गए कुछ गोसेवक जो की सेवक के भेष में तस्कर की भूमिका का निर्वहन कर रहे होते हैं उन्हें सूर्यकांत के आदेशों द्वारा ऊपर बताए गए सिस्टम के अनुसार कसाईयों को बेचवाकर मोटी रकम सूर्यकांत जालान तक पहँुचाने का कुकृत्य कर रहे हैं।


जानिए! अब तक कितने गौवंश मिले जालान के गौशाला को?

युगल बिहारी कालेज के प्रबंधक धर्मेंद्र सिंह द्वारा मांगी गई जनसूचना से ज्ञात हुआ कि कन्दवा थाना चन्दौली द्वारा वर्ष २००९ में १९ बैल ५ गाय गौशाला में दाख़िल कराया गया। थाना बलुआ चन्दौली द्वारा १९९४ से २०१७ तक रामेश्वर मधुबन वृंदावन पांचो शिवाला के गौशाला में ५८ गौवंश दाखिल कराए गए। वहीं सैयदराजा थाना द्वारा १९९४ से अब तक रामेश्वर गौशाला १२९६ गौवंश, तपोवन गौशाला हिसौत मिर्जापुर में १८८ गौवंश, मवेश चन्दौली १४ गौवंश, नागेपुर सकलडीहा गौशाला में ४११ गौवंश और ५५ भैंस ।

भारतीय जीव विज्ञान संस्थान किराव भालीपुर ३८ गौवंश, बलराल गौशाला छतरपुर हण्डिया २७ गौवंश, फेसुडा सैयदराजा ५४ गौवंश, उत्तर प्रदेश विकलांग सेवा समिति द्वारा ३० गौवंश, विमलेश यादव फेसुणा गौशाला ३१ गौवंश, श्रीकृष्ण गौशाला ८२ गौवंश। थाना चकिया जनपद चन्दौली द्वारा वर्ष २००७ में २५ और २००८ में २०४ गौवंश रामेश्वर गौशाला को दिए गए।

वहीं जब दूसरी तरफ जब गौशालाओ में गौवंश की वर्तमान स्तिथी के बारे में जानकारी मांगी गई तो पहले बरगलाया गया क्योंकि नियम है कि अगर दाखिल पशु किसी कारण मृत होते हैं तो उसका पोस्टमार्टम परीक्षण जरूर होता है, जब इस विषय पर पशु चिकित्साधिकारी से धर्मेंद्र सिंह ने जानकारी चाही तो हीलाहवाली के बाद चिकित्साधिकारी ने २ बैलों का पोस्टमार्टम होना बताया। दरअसल होता यह था कि अधिकतर गौवंश को मृत दिखाकर तस्करी कर दी जाती थी। तत्कालीन सीओ सदर राहुल ने गौवंश तस्करी की जांच में पाया कि रामेश्वर गौशाला से पशुओं को बेचा जाता है इसमें शामिल कई गौशाला कर्मियों पर मुकदमा दर्ज किया था।

आरएसएस में सूर्यकांत की तगड़ी घुसपैठ, क्योंकि कराता है पदाधिकारियों को जमकर ऐश अपने बचाव के लिए सूर्यकांत जालान भाजपा की रीढ़ कहे जाने वाले संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में तगड़ी पकड़ रखता है। वैसे तो यह संगठन अपने स्वभिमान सम्मान औऱ राष्ट्र सेवा के लिए जाना जाता रहा है मगर जालान द्वारा सर्वसुविधा उपलब्ध कराने की वजह से संगठन के लोग इसके अनैतिक कृत्यों को अनदेखा कर देते हैं। सूत्र बताते हैं कि सूर्यकांत जालान संघ के कुछ बड़े ओहदेदारों के रुकने,खाने,घूमने,पहनने सहित सभी प्रकार की 'सुविधा' उपलब्ध कराता रहता है। इसके लिए बाकायदा कई आरामगाह बनवाया है। यही कारण है कि संघ व भाजपा के लोग सब जानते बुझते भी चुप रहते हैं।

भाजपा के बड़े नेताओं से है घनिष्ठ सम्बन्ध वर्तमान में केंद्र व यूपी सहित कई राज्यों में भाजपा की सरकार है। समाजसेवी का चोला ओढ़े सूर्यकांत सभी बड़े नेताओं से अपने धनबल, सुविधा और विशेष सेवा के कारण नजदीकी बनाये रखता है। मने जिसकी जैसी जरूरत उसे वैसी सेवा मुहैया! यही कारण है कि यूपी के बड़े नेताओं के अलावा बीजेपी केंद्रीय अध्यक्ष अमितशाह जब मिनी पीएमओ ऑफिस का उद्घाटन करने आये तो सूर्यकांत जालान के यहां भोजन पर गए थे।


आखिर क्यों बना दिया मुख्यमंत्री योगी ने गो तस्करी के आरोपी को गो सेवा आयोग का सदस्य?

के हवाले से यह खबर मिली है कि संघ के बड़े नेताओं के समर्थन और केंद्रीय मंत्री सहित वाराणसी के पड़ोसी जनपद से वर्तमान सांसद की सूर्यकांत जालान से निकटता के कारण ही योगी जी ने एक ऐसे व्यक्ति को गो सेवा आयोग का सदस्य बना दिया जो गोतस्करी में जेल जा चुका है। इससे तो यही प्रतीत होता है कि दूसरों के लिए हराम, भाजपा में रहोगे तो गौ तस्करी है बढ़िया काम। आख़िर हो भी न क्यों जब शासन प्रशासन सूर्यकांत के मुट्ठी में हो ।

...अमित मौर्या की रिपोर्ट