वाराणसी (रणभेरी): काशी विश्वनाथ धाम में रंगभरी एकादशी के अवसर पर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब एक बटुक के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगा। घटना का वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाबा की पालकी गर्भगृह में प्रवेश करने के बाद श्रद्धालुओं को गंगा द्वार पर रोक दिया गया। इसी दौरान लाइन में लगे बटुकों ने अंदर जाने की मांग की, जिस पर पुलिस से कहासुनी हो गई। आरोप है कि एक सिपाही ने बटुक को थप्पड़ जड़ दिए। इसके बाद मौजूद दरोगा ने उसके बाल खींचकर उसे बैरिकेडिंग के पीछे धक्का दे दिया। घंटों कतार में खड़े रहने के बावजूद उसे दर्शन का अवसर नहीं मिला।

महिला श्रद्धालुओं और पत्रकार से भी दुर्व्यवहार का आरोप
मौके पर मौजूद कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि भीड़ नियंत्रित करने के दौरान महिला भक्तों के साथ भी धक्का-मुक्की हुई। वहीं कार्यक्रम की कवरेज करने पहुंची एक महिला पत्रकार ने भी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर अभद्रता का आरोप लगाया है। बीच-बचाव करने आए एक अन्य पत्रकार के साथ भी कथित रूप से हाथापाई और गाली-गलौज की बात सामने आई है।

परंपरा अनुसार निकली बाबा की पालकी
परंपरा के तहत एक दिन पूर्व बाबा पालकी पर सवार होकर महंत आवास गए थे। शुक्रवार को माता संग गौना कराकर लौटते समय पालकी शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। अनुमानित दो लाख से अधिक श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल हुए। भक्त होली के रंग और जयकारों के साथ मंदिर परिसर पहुंचे। पालकी के गर्भगृह में प्रवेश के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई, जिसके चलते श्रद्धालुओं को बाहर रोका गया।
प्रशासन ने दिए जांच के संकेत
मामले पर डीसीपी गौरव बंसवाल ने कहा कि जिन पत्रकारों के पास वैध पहचान पत्र था, उन्हें कार्यक्रम कवरेज की अनुमति दी गई थी और स्पष्ट निर्देश थे कि किसी से अभद्रता न हो। यदि बटुक या पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार की पुष्टि होती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी
