15 जनवरी को मनायी जायेगी खिचड़ी, एकादशी तिथि के दिन करें तिल-गुड़ का दान द्वादशी में ही मिलेगा पूर्ण पुण्यकाल
वाराणसी (रणभेरी): मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी की रात 9.39 मिनट पर लगेगी। लेकिन संक्रांति का पुण्यकाल सूर्योदय के बाद ही मान्य होगा। इस बार मकर संक्रांति का पुण्यकाल सिर्फ 16 घंटे का ही होगा। लेकिन स्नान व दान के लिए श्रद्धालुओं को सात घटे मिलेंगे। 15 जनवरी को प्रात:काल से लेकर अपराह्न 1.39 बजे तक का समय पुण्य प्राप्ति के लिए ज्यादा फलदायी रहेगा। पंचांगों के मुताबिक सूर्य 14 जनवरी की रात 9.39 बजे दक्षिण से उत्तरी गोलार्द्ध में प्रवेश कर जायेंगे।
इसके साथ ही उत्तरायण शुरू हो जायेगा। पंचांगों के मुताबिक रात्रि की बजाय अगले दिन ही पर्व मनाना शास्त्रोक्त विधि के अनुसार उचित रहेगा। हालांकि इस दिन गुरुवार है बावजूद इसके खिचड़ी का सेवन और दान करना पूरी तरह से शुभ है। मकर संक्रांति सूर्य और शनिदेव से जुड़ा हुआ पर्व माना जाता है। इसमें सूर्यदेव शनिदेव के घर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
शास्त्रों की मानें तो खिचड़ी शनिदेव को अतिप्रिय है। यह नवग्रहों की प्रतीक मानी जाती है। इसके चलते ग्रह दोष शांत हो जाते हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय की मानें तो मकर राशि में सूर्य के संक्रमण काल का पुण्यकाल रात्रि में संक्रांति होने पर संक्रांति के बाद की 40 घटी तक यानि कि 16 घटे का होता है। लेकिन, रात्रि में संक्रांति के स्नान-दान आदि कर्म नहीं किये जाते हैं।
ज्योतिष रविकांत तिवारी की मानें तो मकर संक्रांति पर यदि एकाधसी तिथि का संयोग हो तो शास्त्रों के अनुसार इस दिन चावल का सेवन व दान वर्जित माना गया है। अगर मकर संक्रांति एकादशी तिथि के दिन पड़ती है तो खिचड़ी का दान अगले दिन द्वादशी तिथि में करना शास्त्र सम्मत माना गया है। इससे दोनों पर्वों का पुण्यफल मिलता है।
