कोहरे और गलन की गिरफ्त में काशी, 11 जनवरी तक ठंड का सितम जारी

कोहरे और गलन की गिरफ्त में काशी, 11 जनवरी तक ठंड का सितम जारी

वाराणसी (रणभेरी): काशी में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। गुरुवार सुबह से ही शहर कोहरे की मोटी चादर में लिपटा रहा, जिससे दृश्यता घटकर महज 50 मीटर तक सिमट गई। हालात ऐसे रहे कि सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए, वहीं रेल और सड़क यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।

मौसम विभाग के अनुसार हवा की रफ्तार बेहद धीमी रही, जिससे ठंड और गलन का असर और तेज हो गया। शहर का अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 163 रिकॉर्ड किया गया, जो संवेदनशील लोगों के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक माना जा रहा है।

कोहरे और गलन की गिरफ्त में काशी, 11 जनवरी तक ठंड का सितम जारी

11 जनवरी तक जारी रहेगी ठंड

मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल मौसम में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं। आगामी 11 जनवरी तक ठंड, कोहरा और गलन इसी तरह बनी रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसके प्रभाव से बाद में तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन उससे पहले ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है।

अगले दो दिनों का मौसम पूर्वानुमान

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों का पूर्वानुमान भी जारी किया है। 9 जनवरी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में घना कोहरा छाए रहने की संभावना है, जहां दृश्यता शून्य से 100 मीटर तक रह सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर ही घना कोहरा देखने को मिलेगा। दिन में धूप निकलने की संभावना है, लेकिन सर्द हवाओं के कारण गलन बनी रहेगी।

वहीं 10 जनवरी को पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में एक बार फिर घने कोहरे के आसार जताए गए हैं। इस दौरान दृश्यता 20 से 100 मीटर तक रह सकती है। प्रदेश के कुछ इलाकों में बादल भी छाए रहेंगे, जिससे तापमान में लगभग दो डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है।

किसानों की बढ़ी चिंता

ठंड और कोहरे का असर खेती पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से आलू और सरसों की फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि तापमान में गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा, तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और पैदावार घटने का खतरा बढ़ जाएगा।

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अधिक नमी और बदलते तापमान के कारण फसलों में कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है। इससे बचाव के लिए जिंक और क्लोरपाइरीफास जैसी दवाओं का संतुलित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

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