- गंगा आरती देखने के लिए अब 3 किमी दूर नमोघाट जाने की नहीं होगी जरुरत
- बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर श्रद्धालु अब बगल में ही गंगा आरती की लेंगे नजारा
- दशाश्वमेधघाट पर गंगा आरती की भीड़ का दबाव भी होगा कम
राधेश्याम कमल
वाराणसी (रणभेरी): नवसंवत्सर की आगवानी के लिए शिव की नगरी काशी एक बार फिर तैयार है। नवसंवत्सर पर वैसे तो नई सुबह का स्वागत एवं अभिनंदन तो होगा ही, साथ ही काशी में पर्यटकों के लिए एक नये अध्याय की शुरुआत भी हो जायेगी। नवसंवत्सर के प्रथम दिन 19 मार्च को काशी के गंगा घाटों की शृंखला में एक और कड़ी जुड़ जायेगी। यह कड़ी है काशी विश्वनाथ धाम के एकदम नजदीक एवं सटे ललिताघाट पर एक और गंगा आरती की शुरुआत होने जा रही है। यह दिन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन नवसंवत्सर के साथ ही वासंतिक नवरात्र की भी शुरुआत हो रही है। पौराणिक दृष्टि से काशी के ललिताघाट का काफी धार्मिक व पौराणिक महत्व है। यह स्थल काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ललिताघाट पर घाट के ऊपर ललिता देवी स्वयं विराजमान हैं। गंगा तट पर घाट के किनारे ललिता देवी का मंदिर विराजमान है।
यहां पर नवरात्र में श्रद्धालुजन ललिता देवी का दर्शन-पूजन करके अपनी मनौती मानते हैं। वैसे तो यहां पर रोज ही दर्शनार्थियों के आने का क्रम जारी रहता है लेकिन नवरात्र के दिनों में इस मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। ललिताघाट का महत्व एक दृष्टि से और महत्वपूर्ण इसलिए है कि ललिताघाट की ओर से हजारों श्रद्धालु घाट की सीढ़ियों को पार करते हुए काशी विश्वनाथ धाम पहुंच कर बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करते हैं। अब इसी ललिताघाट पर 19 मार्च से गंगा आरती की शुरुआत होने जा रही है। जो भी पर्यटक काशी विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने आते हैं वह बनारस की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती को देखना पसंद करते हैं।
इसके लिए पर्यटकों को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद दशाश्वमेधघाट या फिर अस्सी घाट या फिर यहां से 3 किमी दूर नमोघाट जाना पड़ता था। लेकिन शायद श्रद्धालुओं के कष्ट को देखते हुए बाबा विश्वनाथ ने ललिताघाट पर गंगा आरती के लिए जगह दे दिया। अब गंगा आरती देखने के लिए पर्यटकों अथवा श्रद्धालुओं को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। अब तो श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद विश्वनाथ धाम से एकदम समीप ललिताघाट पर आकर गंगा आरती का नजारा ले सकेंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्र बताते हैं कि ललिताघाट पर गंगा आरती के लिए 7 मंच बनाये जायेंगे। इन सातों प्लेटफार्म पर 7 अर्चक प्रतिदिन मां गंगा की आरती करेंगे। जो काशी विश्वनाथ धाम आये श्रद्धालुओं के लिए एक सौगात ही होगा। यह गंगा आरती रोजाना सायंकाल की जायेगी। अब गंगा आरती देखने के लिए बाहर से आये पर्यटकों को 3 किमी दूर नमो घाट या फिर दशाश्वमेधघाट, अस्सी घाट की ओर नहीं भागना पड़ेगा।
पहले श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने के बाद गंगा आरती का नजारा लेने के लिए इधर-उधर भागते थे लेकिन अब शायद बाबा विश्वनाथ ने भक्तों का कष्ट हरने के लिए यह जगह दे दी है। बाबा विश्वनाथ दरबार में हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होता ही जा रहा है। गत वर्ष 2025 मेंं बाबा विश्वनाथ धाम में 7 करोड़ 75 हजार से भी अधिक श्रद्धालु आये और बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया। ललिताघाट पर शुरु होने जा रही गंगा आरती का आम श्रद्धालुओं ने भी स्वागत किया है। पर्यटकों का मानना है कि विश्वनाथ धाम के एकदम एकदम समीप ललिताघाट पर गंगा आरती शुरु होने से हर किसी को काफी सुविधा मिलेगी। गंगा द्व्रार से बाबा विश्वनाथ धाम आये श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलेगी। गंगा आरती देखने के लिए पर्यटकों को काफी जद्दोजहद का सामना करना पड़ता था। अब तो पर्यटक बाबा विश्वनाथ का दर्शन करके निकलेंगे तो बगल में ही गंगा आरती देख सकेंगे।
