वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के मधुबन परिसर में संविदा कर्मचारियों का चल रहा धरना अब लगातार तेज होता जा रहा है। विभिन्न मांगों को लेकर पिछले पांच दिनों से जारी यह आंदोलन अब और व्यापक रूप लेने लगा है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें स्थायीकरण का लाभ नहीं मिल पाया है। इसके साथ ही वेतन में बढ़ोतरी और नौकरी की सुरक्षा जैसी बुनियादी मांगें भी अब तक पूरी नहीं की गई हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष गहराता जा रहा है।
आंदोलन के पांचवें दिन धरना और अधिक सक्रिय हो गया, जहां कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए एकजुटता का प्रदर्शन किया। उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

इस बीच आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे धरनास्थल पर पहुंचे और कर्मचारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
राघवेंद्र चौबे ने कहा कि वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की अनदेखी उचित नहीं है और उनके हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए।
धरना स्थल पर बढ़ते समर्थन और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद यह मामला और अधिक तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों की भी इस मुद्दे पर नजर बनी हुई है, जिससे आंदोलन का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस आंदोलन के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और कब तक इस गतिरोध को समाप्त किया जा सकेगा।
