(रणभेरी): कानपुर क्षेत्र में खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले और लोगों के बीच “बोतल बाबा” के नाम से प्रसिद्ध हरिओम यादव इन दिनों गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में हैं। एक महिला अनुयायी ने उन पर बंद कमरे में इलाज के बहाने अशोभनीय हरकत करने का आरोप लगाया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 19 जून को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तारी के बाद उनके आश्रमों की गतिविधियां भी बंद हो गई हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद उनके कई अनुयायी अब भी उनके समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। उनका दावा है कि बाबा के आशीर्वाद से अनेक लोगों की परेशानियां दूर हुईं और वे पानी को स्पर्श कर उसे “अमृत” बना देते थे, जिससे बीमारियां ठीक हो जाती थीं।
साधारण परिवार से था संबंध
हरिओम यादव कानपुर देहात जिले के चैन का पुरवा गांव का रहने वाला है। ग्रामीणों के अनुसार उसका परिवार खेती-किसानी से जुड़ा रहा है। पिता कृषि कार्य करते थे और हरिओम भी युवावस्था में खेती में हाथ बंटाता था।

बाद में उसने स्थानीय तहसील में आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र बनवाने का काम शुरू किया। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी शुल्क के अतिरिक्त लोगों से कुछ अतिरिक्त पैसे लेकर वह अपनी आमदनी करता था। उस समय उसकी रोजाना की कमाई लगभग 500 से 600 रुपये बताई जाती है।
एक सपने के बाद बदल गई जिंदगी
गांव के लोगों के मुताबिक वर्ष 2015 के आसपास हरिओम अचानक भगवा वस्त्र पहनकर गांव की चौपाल पर पहुंचा। उसने लोगों को बताया कि उसे रात में देवी काली के दर्शन हुए हैं और देवी ने उसे लोगों की सेवा तथा उनकी परेशानियां दूर करने का आदेश दिया है।
इसी घटना के बाद उसने गांव में काली माता का मंदिर बनवाया और नियमित पूजा-पाठ शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसने लोगों की समस्याओं का समाधान करने और बीमारियों को ठीक करने का दावा करना शुरू किया। कुछ ही वर्षों में आसपास के गांवों से भी लोग उसके पास आने लगे।

‘हरिधाम सरकार’ के नाम से बनाई पहचान
मंदिर बनने के बाद हरिओम ने अपने अनुयायियों से खुद को “हरिधाम सरकार” कहकर संबोधित करने को कहा। समय के साथ मंदिर परिसर के आसपास एक बड़ा आश्रम भी तैयार कराया गया। वहीं नियमित रूप से दरबार लगने लगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे।
आश्रम में देवी की प्रतिमा को “चैन का पुरवा वाली देवी” के नाम से प्रचारित किया गया और दरबार के दौरान इसी नाम का जयघोष कराया जाता था। ग्रामीणों और आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार हरिओम विभिन्न प्रकार के चमत्कारिक उपचार करने का दावा करता था।
- पानी को अमृत बनाने का दावा
आश्रम आने वाले लोगों को पहले दुकान से पानी की बोतल खरीदनी होती थी। इसके बाद हरिओम उस बोतल पर फूंक मारकर या हाथ लगाकर उसे “अमृत” बताता और दावा करता कि इसे पीने से गंभीर से गंभीर बीमारी भी ठीक हो सकती है।
- गर्भवती महिलाओं को सेब देना
वह एक सेब पर फूंक मारकर गर्भवती महिलाओं को देता था और दावा करता था कि इसे खाने से पुत्र का जन्म होगा।
- हाथों से दर्द निकालने का दावा
दरबार में वह शरीर पर हाथ फेरते हुए विशेष आवाजें निकालता और कहता कि इससे शरीर का दर्द बाहर निकल जाता है तथा व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है।
आश्रम में बढ़ती गई भीड़
शुरुआत में आसपास के गांवों के लोग ही उसके पास आते थे, लेकिन धीरे-धीरे दूर-दराज के जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचने लगे। मंगलवार और शनिवार को विशेष दरबार लगाया जाता था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर आते थे।
2022 में हुआ भव्य आश्रम उद्घाटन
8 अगस्त 2022 को गांव में बने आश्रम का भव्य उद्घाटन कराया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े कई लोगों को आमंत्रित किया गया। ग्रामीणों के अनुसार यह आश्रम गांव के एक व्यक्ति की जमीन पर बनाया गया था। उद्घाटन के बाद यहां नियमित रूप से धार्मिक आयोजन और दरबार आयोजित होने लगे।
दरबार में अलग-अलग वेशभूषा में आता था
श्रद्धालुओं के अनुसार हरिओम दरबार में कभी दूल्हे जैसी पोशाक पहनकर सिंहासन पर बैठता था तो कभी पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनता था। इसी दौरान लोगों की समस्याएं सुनी जाती थीं और तथाकथित समाधान बताए जाते थे।
दर्शन के लिए रसीद और बोतल खरीदना जरूरी
ग्रामीणों का कहना है कि आश्रम में प्रवेश के लिए पहले 100 रुपये की रसीद कटती थी। बाद में यह राशि बढ़ाकर लगभग 250 रुपये कर दी गई। इसके अलावा श्रद्धालुओं को आश्रम की दुकान से पानी की बोतल भी खरीदनी पड़ती थी। इसी पानी को हरिओम स्पर्श कर “अमृत” बनाने का दावा करता था।
फायदा न मिलने पर विशेष पूजा की सलाह
यदि कोई व्यक्ति कहता कि उसे कोई लाभ नहीं हुआ, तो कथित तौर पर उसे बताया जाता कि उस पर किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव है और विशेष पूजा करानी होगी। आश्रम में मौजूद सहयोगी पूजा सामग्री की सूची तैयार करते थे और सामग्री भी आश्रम से ही खरीदनी पड़ती थी। ग्रामीणों के अनुसार इसकी कीमत तीन हजार से पांच हजार रुपये तक होती थी।
अपनी तस्वीरें भी बिकती थीं
आश्रम में “हरिधाम सरकार” के नाम से हरिओम यादव की तस्वीरें भी उपलब्ध रहती थीं। कई श्रद्धालु इन तस्वीरों को खरीदकर अपने घरों में स्थापित करते थे और उन्हें श्रद्धा के साथ रखते थे।
‘मृत महिला को जीवित करने’ का वीडियो वायरल
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी चर्चा में रहा, जिसमें हरिओम एक महिला को मृत अवस्था से जीवित करने जैसा दावा करता दिखाई देता है। वीडियो में वह कहता है कि वह न बाबा है, न तांत्रिक और न ही उसका कोई गुरु है, बल्कि सूर्य और मां काली ही उसके मार्गदर्शक हैं।
वीडियो में कुछ देर बाद महिला उठ बैठती है और वहां मौजूद लोग जयकारे लगाने लगते हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इसमें दिखाई गई घटना के बारे में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है।
मुंबई की घटना का भी जिक्र
आश्रम से जुड़े एक व्यक्ति ने दावा किया कि मुंबई में रहने वाले एक अनुयायी के बेटे की मृत्यु के बाद हरिओम वहां गया था। कथित तौर पर जब वह उसे जीवित नहीं कर पाया तो उसने कहा कि मृतक ईश्वर के चरणों में पहुंच चुका है और उसे वापस बुलाना उचित नहीं होगा। इसके बाद वह वापस लौट आया।
इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कभी काली माता, कभी अन्य देवी-देवताओं को बताया गुरु
ग्रामीणों का कहना है कि हरिओम अलग-अलग अवसरों पर कभी मां काली, कभी बांके बिहारी, कभी शारदा भवानी और कभी बालाजी को अपना गुरु बताता था। दरबार में समय-समय पर इन्हीं देवी-देवताओं के जयकारे भी लगवाए जाते थे।
महिला की शिकायत के बाद कार्रवाई
महिला अनुयायी द्वारा लगाए गए अशोभनीय हरकत के आरोप के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। 19 जून को हरिओम यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद आश्रम की गतिविधियां लगभग पूरी तरह बंद हो गई हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
