भारी फोर्स के साथ चौक की तरफ से ध्वस्त किए जा रहे मकान
ड्रोन और वीडियोग्राफी से रखी गई हर गतिविधि पर नजर, दुकानदारों और मकान मालिकों में मुआवजे को लेकर चिंता
वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के ऐतिहासिक और व्यावसायिक हृदयस्थल दालमंडी में सोमवार को विकास की एक नई पटकथा लिखी गई। वर्षों से जाम, अतिक्रमण और संकरी सड़कों से जूझ रहे इस इलाके में आखिरकार प्रशासन का बुलडोजर गरज उठा। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सड़क चौड़ीकरण के लिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई, जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। नए साल की शुरुआत के साथ दालमंडी में यह पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, जिसे प्रशासन शहर के कायाकल्प की दिशा में एक अहम कदम बता रहा है।
सुबह होते ही दालमंडी की गलियों में पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती कर दी गई थी। कई थानों की फोर्स के साथ उच्चाधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मकान संख्या सी 39/72 से बुलडोजर चलाकर अवैध और बाधक निर्माणों को हटाने का काम शुरू हुआ। जैसे ही मशीनें चलीं, वर्षों से जमी दीवारें और दुकानों के आगे बने अस्थायी ढांचे ढहने लगे। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह चिन्हित अतिक्रमणों और बाधक निर्माणों पर की जा रही है, ताकि सड़क को तय मानक के अनुसार चौड़ा किया जा सके।

दालमंडी वाराणसी का ऐसा इलाका है, जहाँ दिनभर हजारों लोग खरीदारी, व्यापार और आवाजाही के लिए पहुंचते हैं। संकरी सड़कों और बेतरतीब अतिक्रमण के कारण यहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और आम वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को देखते हुए नगर निगम और विकास प्राधिकरण ने सड़क चौड़ीकरण की योजना बनाई है, जिसे अब जमीन पर उतारा जा रहा है। कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह के विरोध या अव्यवस्था से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह अलर्ट रही। ड्रोन कैमरों और वीडियोग्राफी के जरिए भी निगरानी की गई। अधिकारी खुद मौके पर घूम-घूमकर स्थिति का जायजा लेते रहे। हालांकि कुछ दुकानदार और मकान मालिक अपनी संपत्ति को लेकर चिंतित दिखे, लेकिन किसी बड़े विरोध या टकराव की खबर नहीं आई।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली रही। कुछ व्यापारियों का कहना है कि सड़क चौड़ी होने से ग्राहकों की आवाजाही बढ़ेगी और कारोबार को फायदा होगा। वहीं, कुछ लोगों को डर है कि उन्हें पर्याप्त मुआवजा मिलेगा या नहीं, और उनका रोज़गार कैसे चलेगा। प्रशासन का कहना है कि जिनकी संपत्तियां प्रभावित होंगी, उन्हें नियमानुसार नोटिस और मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारियों ने साफ किया कि यह कार्रवाई किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि शहर के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए है। दालमंडी जैसे पुराने और भीड़भाड़ वाले इलाके में अगर बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं। सड़क चौड़ीकरण के बाद यहां ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी, पैदल यात्रियों को राहत मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियां भी अधिक सुचारु होंगी। फिलहाल, बुलडोजर की गूंज ने दालमंडी में बदलाव का संकेत दे दिया है। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में अन्य चिन्हित स्थानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। दालमंडी के लिए यह एक कठिन लेकिन जरूरी दौर माना जा रहा है, जो भविष्य में इलाके को एक नई पहचान दे सकता है।

187 मकानों को ढहाने के लिए चिह्नित किया
वाराणसी नगर निगम ने 187 मकानों को ढहाने के लिए चिह्नित किया है। इनके मालिकों को करीब 191 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाना है। इनमें 14 दुकानदारों ने मुआवजा लेने के बाद ध्वस्तीकरण की मंजूरी लिखित में दी है। सबसे पहले इनके ही मकान-दुकान गिराए जा रहे हैं। अब तक 2 ही मकान गिराए गए थे। दालमंडी को अंग्रेज ‘डॉलमंडी’ कहते थे। बॉलीवुड अभिनेत्री नरगिस की मां और एक्टर संजय दत्त की नानी जद्दनबाई यहीं से थीं। बनारस घराने के मशहूर तबलावादक लक्ष्मी नारायण सिंह यानी लच्छू महाराज का भी यहां से गहरा नाता था।
