वाराणसी (रणभेरी): लगातार गंगा में डूबने और हादसों की घटनाओं को देखते हुए कमिश्नरेट पुलिस ने गंगा घाटों को सुरक्षित बनाने का बड़ा निर्णय लिया है। अस्सी घाट से लेकर नमो घाट तक लगभग तीन किलोमीटर लंबे क्षेत्र को श्रद्धालुओं और स्नानार्थियों के लिए सुरक्षित किया जाएगा।
पुलिस भीड़भाड़ वाले घाटों पर फ्लोटिंग जेटी और जाल लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी। शासन ने कमिश्नरेट पुलिस के प्रस्ताव पर पर्याप्त बजट जारी किया है और टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अप्रैल के अंतिम सप्ताह से बैरिकेडिंग और जाल बिछाने का काम शुरू होगा।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि वाराणसी के घाटों को प्रयागराज महाकुंभ की तर्ज पर सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाएगा। प्रमुख घाटों को चिन्हित कर फ्लोटिंग बैरिकेडिंग के जरिए स्नान करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

घाटों पर स्नान के लिए सीमित क्षेत्र निर्धारित किया जाएगा और बड़े खंभों के जरिए ज़ोन बनाए जाएंगे। बैरिकेडिंग के अंदर ही स्नान की अनुमति होगी, जबकि इसे पार करने पर सख्त कार्रवाई होगी। निगरानी के लिए जल पुलिस, NDRF और SDRF की टीमें मुस्तैद रहेंगी।
अगले महीने पासिंग आउट परेड के बाद काशी को 1000 नए पुलिसकर्मी मिलेंगे, जिनमें से कई को जल पुलिस में तैनात किया जाएगा।
इस परियोजना में अस्सी घाट से नमो घाट तक के प्रमुख स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां भारी भीड़ जुटती है। लोहे और प्लास्टिक की फ्लोटिंग जेटी लोगों को गहरे पानी में जाने से रोकेंगी, जबकि जाल फिसलने पर डूबने से बचाएगा।
पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बढ़ाने के लिए संख्या बढ़ाकर 32 से 100 पुलिसकर्मियों तक पहुंचाई जाएगी। आठ किलोमीटर में फैले 84 घाटों की निगरानी के लिए 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली स्पीड बोट पहले से तैनात हैं। इस कदम से गंगा में डूबने की घटनाओं में कमी आने और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित स्नान क्षेत्र सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
