वाराणसी (रणभेरी): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की महिला खो-खो टीम की खिलाड़ियों ने शुक्रवार देर रात केंद्रीय कार्यालय के बाहर धरना देकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। खिलाड़ियों का आरोप है कि अंतर विश्वविद्यालयी प्रतियोगिता के लिए चयन होने के बावजूद अंतिम समय में टीम को प्रतियोगिता में भेजने से मना कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, ओडिशा के फकीर मोहन विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली ईस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी खो-खो प्रतियोगिता के लिए बीएचयू की टीम का चयन विभिन्न संकायों से किया गया था। खिलाड़ियों का कहना है कि चयन के बाद वे नियमित अभ्यास भी कर रही थीं, लेकिन प्रतियोगिता से लगभग 48 घंटे पहले अचानक टीम न भेजने की सूचना दे दी गई।

चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
खिलाड़ियों के मुताबिक, 24 जनवरी को ट्रायल और फिटनेस टेस्ट के बाद 12 खिलाड़ियों का चयन किया गया था। बाद में क्रीड़ा परिषद ने कहा कि केवल 9 खिलाड़ी ही मानकों पर खरी उतरी हैं, जिससे टीम भेजना संभव नहीं है। इस पर खिलाड़ियों ने कुलपति से शिकायत की, जिसके बाद दोबारा चयन प्रक्रिया कराई गई।
दूसरे ट्रायल 5 फरवरी को हुए, जिसमें खिलाड़ियों का दावा है कि कई प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर तक खेल चुकी हैं। इसके बावजूद इस चयन में केवल 6 खिलाड़ियों को ही योग्य बताया गया, जिसके चलते टीम भेजने का फैसला रद्द कर दिया गया। खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन शुरुआत से ही टीम को प्रतियोगिता में भेजने के पक्ष में नहीं था।

रात में पहुंची प्रॉक्टोरियल टीम
धरने की सूचना मिलते ही रात में प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम मौके पर पहुंची और छात्राओं से बातचीत की। इस दौरान खिलाड़ियों और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच तीखी बहस भी हुई। बाद में छात्राओं को केंद्रीय कार्यालय परिसर से हटाया गया। खिलाड़ियों ने ज्ञापन सौंपकर धरना समाप्त कर दिया।

विश्वविद्यालय का पक्ष
विश्वविद्यालय क्रीड़ा परिषद के महासचिव प्रो. ए.के. नेमा ने बताया कि दो बार चयन प्रक्रिया के बावजूद केवल 6 खिलाड़ी ही मानकों पर खरी उतरीं। टीम गठन के लिए आवश्यक संख्या पूरी न होने के कारण इस बार बीएचयू की खो-खो टीम प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाएगी। धरने के बाद अब यह मामला विश्वविद्यालय प्रशासन और खिलाड़ियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
