दो घंटे की कार्रवाई के बाद बढ़ा आक्रोश, बुलडोजर पर चढ़े वकील और पहियों के सामने लेटे; महिला वकील रोती दिखीं
(रणभेरी): जिला कोर्ट परिसर में अवैध चैंबरों के ध्वस्तीकरण को लेकर सोमवार को नगर निगम की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हुआ। नगर निगम ने 211 चैंबरों को गिराने की कार्रवाई शुरू की तो वकील विरोध में सड़क पर उतर आए। पहले वकील सड़क पर बोरियां बिछाकर बैठ गए, फिर नारेबाजी करते हुए कार्रवाई का विरोध करने लगे। करीब दो घंटे तक ध्वस्तीकरण जारी रहने के बाद वकीलों का आक्रोश बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने एक बुलडोजर को रोक लिया और उसके ऊपर चढ़ गए। कुछ वकील बुलडोजर के पहियों के सामने लेट गए। इस दौरान कई महिला वकील भावुक होकर रोती नजर आईं। पुलिस अधिकारी लगातार वकीलों को समझाने का प्रयास करते रहे।
नगर निगम की ओर से सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। चैंबरों को गिराने के बाद बुलडोजर से मलबा हटवाया गया। कार्रवाई के दौरान कुछ वकीलों ने अधिकारियों के सामने मांग रखी कि यदि अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं तो सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना था कि चुनिंदा निर्माणों को निशाना बनाने के बजाय नियमों का एकसमान पालन किया जाए।
हाईकोर्ट में अपील खारिज होने के बाद कार्रवाई
चैंबरों को गिराने की कार्रवाई से पहले वकील नगर निगम के खिलाफ अपील लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे, लेकिन उनकी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद नगर निगम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी। इससे पहले मई से अगस्त के बीच दो चरणों में 72 अवैध चैंबर तोड़े जा चुके हैं। अब नगर निगम ने 211 चैंबरों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की।

नगर निगम की ओर से संबंधित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों के खिलाफ 14 आपत्तियां आई थीं, जिनका निस्तारण करने का दावा निगम अधिकारियों ने किया। यह कार्रवाई पहले 11 अक्तूबर को प्रस्तावित थी, लेकिन आपत्तियों के निस्तारण और अदालत में अपील लंबित होने के कारण इसे टाल दिया गया था।
कागजात लेकर अधिकारियों के सामने पहुंचे भवन मालिक
ध्वस्तीकरण के दौरान कुछ भवन मालिक अपने कागजात लेकर पुलिस अधिकारियों के सामने डटे रहे। उनका कहना था कि भवनों के सभी दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद नगर निगम ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया। एक भवन मालिक ने दावा किया कि उनकी जमीन फ्रीहोल्ड है और नगर निगम की ओर से उसका असेसमेंट भी किया गया है। इसके बावजूद संपत्ति को अवैध निर्माण बताकर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को दस्तावेज दिखाने की बात भी कही।
वहीं, वकीलों ने सवाल उठाया कि जब कुछ संपत्तियों पर कार्रवाई हो रही है तो आसपास मौजूद अन्य निर्माणों के मामले में भी समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। इस मुद्दे को लेकर मौके पर काफी देर तक तनाव बना रहा।
दुकानों पर कार्रवाई को लेकर भी उठे सवाल
बलरामपुर अस्पताल की दूसरी पटरी पर कचहरी की ओर कई दुकानें हैं। इनमें नगर निगम की ओर से आवंटित दुकानें भी शामिल हैं। इसके अलावा लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की ओर से आवंटित 800 वर्गफुट क्षेत्र में भी कई दुकानें मौजूद हैं। वकीलों ने इन दुकानों को लेकर भी सवाल उठाए और मांग की कि यदि अवैध निर्माण हटाए जा रहे हैं तो सभी पर कार्रवाई हो, अन्यथा किसी के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई न की जाए। इसी विरोध के बीच बुलडोजर को पीछे हटाना पड़ा।
वैध संपत्तियों पर मार्किंग का भी आरोप
वकीलों के चैंबरों के अलावा नगर निगम के अधिकारियों ने कुछ अन्य संपत्तियों पर भी लाल क्रॉस का निशान लगाया था। संबंधित संपत्ति मालिकों का दावा है कि इनमें कुछ निर्माण वैध हैं। ऐसे में कुछ लोगों ने अपनी संपत्तियों पर लगाए गए लाल क्रॉस के निशान को सफेद रंग से पोत दिया। इसके बाद वहां नोटिस के स्थान पर संपत्ति से संबंधित विस्तृत जानकारी लिखकर चस्पा कर दी गई।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान विरोध, वैध-अवैध निर्माण को लेकर उठे सवाल और भवन मालिकों के दावों के चलते जिला कोर्ट परिसर के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। पुलिस अधिकारी प्रदर्शन कर रहे वकीलों को समझाने में जुटे रहे, जबकि नगर निगम की टीम ने चैंबरों को गिराने और मलबा हटाने की कार्रवाई जारी रखी।
