नाटी इमली में उमड़ा आस्था का सैलाब, कंधों पर उठाकर लाए गए करीब 5 टन वजनी पुष्पक विमान; काशी नरेश हाथी पर सवार होकर पहुंचे
वाराणसी (रणभेरी): धर्म और आस्था की नगरी काशी के नाटी इमली में ऐतिहासिक भरत मिलाप लीला का भव्य आयोजन हुआ। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के मिलन का साक्षी बनने के लिए एक लाख से अधिक श्रद्धालु जुटे। लीला स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी, वहीं आसपास के मकानों की छतों पर भी हजारों लोग इस ऐतिहासिक क्षण को देखने के लिए जमा रहे। पूरा इलाका जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
लीला के दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण पुष्पक विमान से लीला स्थल पहुंचे। करीब पांच टन वजनी इस पुष्पक विमान को यादव बंधु अपने कंधों पर उठाकर लाए। विमान के पहुंचते ही श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। इस दौरान विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में लीला देखने पहुंचे।
जमीन पर लेटकर भरत और शत्रुघ्न ने किया स्वागत
भरत मिलाप लीला का सबसे भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के स्वागत के लिए भरत और शत्रुघ्न जमीन पर लेट गए। अपने छोटे भाइयों को इस अवस्था में देखकर राम और लक्ष्मण खुद को रोक नहीं सके। दोनों रथ से उतरकर दौड़ पड़े और अपने भाइयों को जमीन से उठाया।
इसके बाद भगवान श्रीराम ने भरत को और लक्ष्मण ने शत्रुघ्न को गले से लगा लिया। चारों भाइयों के इस मिलन को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। पूरे मैदान में जय श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे। चारों भाइयों के स्वरूप में सजे बाल कलाकारों ने एक-दूसरे को गले लगाया तो श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
मुकुट और फूलों की माला से सजे चारों भाई
भरत मिलाप के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूप में सजे बाल कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण की थी। चारों के सिर पर मुकुट और गले में फूलों की माला थी। पीछे खड़े पुजारियों ने चंवर झुलाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद चारों भाइयों को रथ पर सवार कराया गया और रथ को लीला मैदान में घुमाया गया। इस दौरान काशी नरेश भी हाथी पर सवार होकर लीला स्थल पहुंचे। उनके आगमन और चारों भाइयों के मिलन ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया।
छोटे बच्चे ने पूरे उत्साह से लगाए जय श्रीराम के नारे
भरत मिलाप लीला में रथ उठाने पहुंचे छोटे बच्चे अथर्व यादव का उत्साह भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। रिपोर्टर से बातचीत में अथर्व ने बताया कि वह रथ उठाने आया था और उसने रथ उठाया भी। जब उससे जय श्रीराम और हर-हर महादेव का उद्घोष करने के लिए कहा गया, तो उसने पूरे उत्साह के साथ दोनों नारे लगाए। अथर्व का यह उत्साह आयोजन में शामिल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। रथ उठाने की परंपरा में यादव बंधुओं की भागीदारी इस लीला की खास पहचान मानी जाती है।
भाईचारे, त्याग और समर्पण का संदेश देती है भरत मिलाप लीला
भरत मिलाप लीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रेम, त्याग, मर्यादा और समर्पण का प्रतीक भी है। भगवान श्रीराम और उनके भाइयों का मिलन लोगों को आपसी प्रेम और रिश्तों की अहमियत का संदेश देता है। इसी भावनात्मक जुड़ाव के कारण हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस लीला को देखने के लिए काशी पहुंचते हैं। नाटी इमली में उमड़ी भीड़ और श्रद्धालुओं का उत्साह एक बार फिर काशी की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाता नजर आया।
