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शनिवार, 9 अप्रैल 2016
एक सच जो आपको हैरान कर देगा!

ईमानदारी का डंका पीटने वाली भाजपा के महापौर व विधायक दस्तूरी प्रथा के सवाल पर मौन क्यों है?



  • वाराणसी नगर निगम में दस्तूरी के नाम पर होती है करोड़ो की अवैध वसूली
  • शहर में सुबह और शाम दो बार झाड़ू सफाई का दिया जाता है प्रत्येक सफाई कर्मियों को वेतन
  • शाम के वक्त झाड़ू न लगाने के एवज में सफाईकर्मियों से वसूली जाती है दस्तूरी
  • अधिकारियों व भ्रष्ट सपेâदपोशों की मिली भगत से केवल एक बार झाड़ू लगाने की बनी है परम्परा
  • प्रदेश सरकार नगर निगम के अधिकारियों की सम्पत्ति की जांच करा ले
  • सरकार किसी जांच एजेंसी से जांच करा लें तो दर्जनों अधिकारी होंगे सलाखों के पीछे
  • अब जनता को अपने पार्षदों से भी पूछना होगा कि क्यों लगा है उनके मुँह पर ताला



          आज भ्रष्टाचार में डूबे वाराणसी नगर निगम के हर विभाग में भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हो चुकी हैं कि इससे नि़जात पाने के लिये दृढ़संकल्प और वास्तविक ईमानदारी की जरूरत है। वाराणसी की जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से स्थापित वाराणसी नगर निगम अपने दायित्वों को पूरा करने के लिये कितना जागरूक और ईमानदार है यह वाराणसी शहर की स्थिति को देखकर पता लगाया जा सकता है। नगर निगम के निचले कर्मचारी से लेकर ऊपर तक के अफसर किसी ना किसी रूप में भ्रष्टाचार में लिप्त है। दस्तूरी प्रथा इसका एक ज्वलंत उदाहरण है। वाराणसी की जनता के लिए यह सबसे बड़ी खबर होगी कि आपके शहर में सफाई कर्मियों को दो वक्त झाड़ू-सफाई का कार्य करने का वेतन दिया जाता है। इसके बावजूद भी पूरे शहर में केवल एक ही समय झाड़ू-सफाई का कार्य होता है। आश्चर्य की बात यह है कि वाराणसी नगर निगम में यह भ्रष्ट परम्परा कई वर्षों से चली आ रही है और सबसे शर्मनाक विषय यह है कि इतने गम्भीर मसले पर पूरे शहर के जनप्रतिनिधि मौन है, या फिर ये कहा जाय कि नगर निगम पहुँचने वाले जनप्रतिनिधियों को चांदी की जूती पहना कर उन्हे भी इस गिरोह में शामिल कर लिया जाता है! दस्तूरी प्रथा के रूप में नगर निगम में कार्यरत सभी कर्मचारियों से प्रति माह एक करोड़ रूपये की अवैध वसूली की बात वार्ड नं. ६२ राजमंदिर के पार्षद अजीत सिंह बताते है। अजीत सिंह ने विगत दिनों नगर निगम में आयोजित बजट सत्र की बैठक में भी इस गम्भीर विषय पर बड़े ही बेबाकी से सवाल किया था, लेकिन नगर निगम सदन की उस बैठक में अजीत सिंह के सवाल पर अधिकारियों के साथ-साथ महापौर व तमाम वरिष्ठ पार्षदों ने अपना सिर नीचे झुका लिया था। अजीत सिंह का आरोप है कि नगर निगम में कई वर्षों से चली आ रही दस्तूरी की परम्परा में अधिकारी सहित महापौर व कई पार्षद भी शामिल हैं। उन्होने प्रदेश व वेंâद्र की सरकार को भी इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच कराने हेतु पत्र लिखा है। अजीत सिंह ने दावा किया है कि दस्तूरी की वसूली में हिस्सेदार जनप्रतिनिधियों व नगर निगम के अधिकारियों की मिली भगत से ही यह खेल खेला जा रहा है, जिसकी वजह से शहर में समुचित सफाई व्यवस्था न हो पाने की समस्या से जनता को परेशान होना पड़ता है। उन्होने यह भी कहा कि भाजपा का दोहरा चरित्र है,एक ओर देश के प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान की बात करते हैं दूसरी ओर उन्ही की पार्टी के महापौर व नगर के तीनों विधायक दस्तूरी का मौन समर्थन कर रहे हैं। अजीत सिंह ने दस्तूरी के मसले पर जन सहयोग की बदौलत निर्णायक लड़ाई लड़ने का निश्चय कर लिया है, उनका दावा है कि इस कुप्रथा के खिलाफ उनके साथ पूरे शहर की जनता होगी वो जन-जन को दस्तूरी प्रथा से अवगत कराकर इस व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन करेंगे ताकि इस कुप्रथा का अंत हो। वाराणसी के समस्त सम्मानित जनों से हमारी अपील,

          आप वाराणसी के एक जिम्मेदार नागरिक हैं, दस्तूरी प्रथा वाराणसी नगर निगम में कई वर्षों से व्याप्त एक भ्रष्ट व्यवस्था का नाम है, इस विषय पर यह समाचार पत्र अपने प्रथम अंक के प्रकाशन के दिन से ही लगातार अपनी पड़ताल के माध्यम से प्राप्त जानकारी एवं सूचनाओं से आपको अवगत करा रहा है। दस्तूरी प्रथा के बारे में यदि आपके पास कोई जानकारी हो अथवा आपके क्षेत्र का कोई सफाई कर्मी जो इस व्यव्स्था से पीड़ित हो और अपनी बात हम तक पहुँचाना चाहता हो तो आप हमें तत्काल सूचित करें। हम इस विषय पर आपके विचारों को भी प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे। आप अपनी राय हमे भेज सकते हैं। और आप भी अपने जनप्रतिनिधियों से इस विषय पर सवाल अवश्य करें।