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शनिवार, अक्टूबर 08, 2016
रहजन तो रहजन, रहबर भी लुटेरे हैं - मुनकाद अली



सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने

  • बाबरी मस्जिद की गुम्बद पर पहला फावड़ा चलाने वाले साक्षी महाराज को राज्यसभा भेजा...
  • बाबरी विध्वंस के दोषी कल्याण सिंह को अपने सीने से लगाकर सपा में शामिल कराया...
  • कल्याण सिंह के बेटे को अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया...
  • मुसलमानों से अट्ठारह प्रतिशत आरक्षण देने का झूठा वादा कर सत्ता हथियाया...

Munka Ali BSP Leader

वो फिर भी कहते हैं कि......

हम मुसलमानों के सच्चे हमदर्द हैं!

          ‘‘हयात लेके चलो, कायनात लेके चलो, चलो तो सारे जमाने का साथ लेके चलो।’’ यह पैगाम है बहुजन समाज पार्टी का, यह पैगाम है बहन कुमारी मायावती का, मैं आज बहन कु. मायावती का पैगाम लेकर आप सभी के बीच आया हूं। यह जोरदार उद्गार बसपा के वाराणसी/मिर्जापुर/इलाहाबाद मण्डल के मुख्य जोन कोआर्डिनेटर व राज्यसभा सांसद जनाब मुनकाद अली साहब के हैं। विगत दिनों वाराणसी के वैâण्ट विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत बसपा प्रत्याशी/प्रभारी रिजवान अहमद के समर्थन में आयोजित एकदिवसीय भाईचारा रैली के विशाल मंच पर मुनकाद अली साहब बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे। दरअसल वर्ष २०१७ में होने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमों मायावती ने वाराणसी/मिर्जापुर/इलाहाबाद मण्डल के मुस्लिम मतदाताओं को बसपा के पक्ष में करने की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद मुनकाद अली को सौंपा है। जनसभाओं के माध्यम से मुस्लिम मतदाताओं को बसपा से जोड़ने की कवायद में मुनकाद अली

          जी-जान से लगे हुए हैं। वैâण्ट विधानसभा क्षेत्र के जयनारायण इण्टर कालेज के मैदान में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’, बहुजन भाईचारा कार्यकर्ता सम्मेलन को सम्बोधित करने पहुंचे राज्य सभा सांसद मुनकाद अली ने एक-एक करके बारी बारी से मुसलमानों का फायदा उठाने वाले राजनैतिक दलों को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने इस मंच के माध्यम से समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से कई ज्वलन्त सवाल करते हुए उपस्थित जन समुदाय से कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग आपसे वोट मांगने के लिए आएं तो उनसे हमारे सवालों का जवाब जरूर मांगना। इस एकदिवसीय रैली में हजारों की संख्या में हिन्दू व मुस्लिम एक साथ मुनकाद अली को सुनने के लिए पहुंचे थे।

          मुनकाद अली ने कहा कि देश को आजाद हुए ६९ साल हो चुके हैं। हम सब यह कहते हैं कि हम आजाद हैं। इस देश के अन्दर हर पार्टी के नुमाइन्दे भी कहते हैं कि हम आजाद हैं। इस देश को आजाद कराने में सर्वसमाज का योगदान रहा है, हर समाज के नौजवानों ने आजादी की खातिर अपना खून बहाया था। सर्वसमाज की माताओं एवं बहनों ने अपने बेटों एवं भाइयों को खोया था, सबकी कुर्बानी का सिर्पâ एक ही मकसद रहा कि इस देश में हम सभी आजादी की जिन्दगी जी सके। लेकिन हकीकत तो यह है कि इस देश के दलित, मुस्लिम, पिछड़े और अपर कास्ट के जो भी गरीब लोग हैं। वो आज भी गुलामों से बदतर जिन्दगी जी रहे हैं। इन सब की लड़ाई बहुजन समाजपार्टी लड़ रही है इसलिए सर्वसमाज को अपनी आजादी की खातिर बसपा के साथ जुड़ जाना चाहिए। ६९ साल की इस आजादी में केवल गरीबों का शोषण हुआ है, गरीबों की ही बलि चढ़ाई गयी। मुनकाद अली ने कहा कि यदि बहनजी प्रदेश की मुख्यमंत्री बनती हैं तो किसी की बलि नहीं चढ़ेगी। उन्होंने अपने बारे में बताया कि ‘‘मैं कौम के दर्द के खातिर राजनीति कर रहा हूँ, हमें शिकायत है अपने मुस्लिम भाइयों से क्योंकि वह सही वक्त पर सही पैâसला कभी नहीं करते हैं, चुनाव के वक्त हर पार्टी के लोग मुसलमानों की दुहाई लगाते हैं, मैं उस रिश्ते के नाते आप सबके बीच आया हूँ, जो एक मुसलमान का दूसरे मुसलमान से होता है।’’

          उन्होंने कहा कि जब-जब चुनाव नजदीक आता है सभी पार्टियां मुसलमानों की हमदर्द बन जाती हैं। चाहे प्रदेश का चुनाव हो या देश का चुनाव हो। सपा, कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा भी चुनाव के वक्त खुद को मुसलमानों का हमदर्द बताती है। क्योंकि यह लोग जानते हैं कि १८ प्रतिशत मुसलमानों का साथ जिसे मिलेगा, वही सरकार बनायेगा। इन राजनैतिक पार्टियों की हमदर्दी मुसलमानों के साथ केवल तब तक होती है, जब तक मुसलमानों का वोट न पड़ जाये और फिर इनके वोट के दम पर हुवूâमत हासिल करने वाले ये लोग मुसलमानों को भूल जाते है। आजादी से आज तक जिसे भी मुसलमानों ने कुर्सी पर बैठाने का काम किया। उसी ने मुसलमानों को कमजोर करने का काम किया। जब देश आजाद हुआ तो उस समय कांग्रेस ने एक सर्वे कराया। उस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार हर जगह मुसलमानों की २८ प्रतिशत हिस्सेदारी थी। ‘पटवारी से लेकर कमिश्नर तक और सिपाही से लेकर आईजी तक २८ प्रतिशत मुसलमानों की भागीदारी थी और अब ५ वर्ष पूर्व जब कांग्रेस ने सच्चर कमेटी के नाम से एक कमेटी बनाकर पुनः मुसलमानों की स्थिति का जाँच कराया तो मालूम हुआ कि अब मुसलमानों के पास महज ३.५ प्रतिशत ताकत है। जिन मुसलमानों के पास ६५ वर्ष पूर्व २८ प्रतिशत ताकत ही आज महज ३.५ प्रतिशत ताकत बची है, सवाल यह है कि कौन है इसका जिम्मेदार? यह कभी नहीं भूलना की ताकतवर पर कभी जुल्म नहीं होता, जुल्म हमेशा कमजोर वर्ग पर ही होता है। मुसलमानों के बल पर इस देश पर शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी ने मुसलमानों को सबसे ज्यादा कमजोर करने का काम किया। कांग्रेस ने ही हर जगह मुसलमानों की हिस्सेदारी कम करने का काम किया। इतिहास गवाह है कि आजादी से आज तक उन्हीं शहरों में दंगे कराये गए जहां। के मुसलमानों की अच्छी भागीदारी थी। एक साजिश के तहत दंगा कराकर ऐसे स्थानों पर मुसलमानों की ताकत को खत्म कर दिया गया और ये लोग कहते हैं कि हम मुसलमानों के हमदर्द हैं। चाहे कांग्रेस के लोग हों या समाजवादी पार्टी के लोग हों, जिन लोगों ने भी सत्ता हासिल किया उन्होंने मुसलमानों को लुटने का काम किया। रहजन तो रहजन, रहबर भी लुटेरे बन गए।’

          मुलायम सिंह भी कहते हैं कि हम मुसलमानों के हमदर्द है जब सपा के लोग आपसे वोट माँगने आए तो उनसे यह सवाल जरूर करना कि बाबरी मस्जिद की गुम्बद पर पहला फावड़ा चलाने वाले साक्षी महाराज को उन्होंने देश की सबसे बड़ी पंचायत में भेजकर कौन-सा रिश्ता निभाया था। बाबरी मस्जिद के विध्वंस के दूसरे ही दिन साक्षी महाराज ने ऐलान किया था कि ‘बाबरी पर पहला फावड़ा मैने मारा।’ मुलायम सिंह यादव ने कुछ ही समय बाद उसी साक्षी महाराज को समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा में भेजने का काम किया, जो मुसलमानों के मस्जिद गिराने का काम करते हैं, मुलायम सिंह उसे संसद में बैठाने का काम करते हैं और कहते हैं कि हम मुसलमानों के सबसे बड़े हमदर्द हैं।

          वह कल्याण सिंह जिसे अदालत ने बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में सजा सुनाया उसी कल्याण सिंह को मुलायम सिंह ने आगरा की भरी सभा में अपने सीने से लगाकर अपनी पार्टी में शामिल किया था, उनके बेटे को अपनी सरकार में वैâबिनेट मंत्री बनाने का काम किया और कहते हैं कि हम मुसलमानों के सबसे बड़े हमदर्द है। पूछिये उनसे की कहां से ये मुसलमानों के हमदर्द हो गये?

          सच तो यह है कि ये कभी मुसलमानों के हमदर्द नहीं हो सकते, ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करना चाहिए, जिन्होंने ‘ना इज्जत बख्शा, ना दौलत बख्शा और ना ही इदायरों को बख्शा।’ चाहे कांग्रेस के लोग हों या समाजवादी पार्टी के लोग हों उन सबने मुसलमान के जज्बात से खेलने का काम किया है। २०१२ के चुनाव से पहले सपा ने मुसलमानों को १८ प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया और गुमराह करके सारा वोट ले लिया, लेकिन जब कुर्सी मिली तो वह आरक्षण की बात भूल गये।

          बहन मायावती का वादा है कि जिसकी ‘‘जितनी हिस्सेदारी होगी उसकी उतनी भागीदारी होगी।’’ मुनकाद अली ने भाईचारा कायम रखने की गुजारिश करते हुए कहा कि सपा, भाजपा के साजिश रचने वालों से होशियार रहना और कभी आपस में भाईचारा भुलाकर लड़ाई मत करना। उन्होंने भाईचारा सम्मेलन में हजारों की तादाद में मौजूद जन समुदाय से बसपा प्रत्याशी रिजवान अहमद को जिताकर विधानसभा में भेजने व बहन मायावती को ५वीं बार मुख्यमंत्री बनाने की गुजारिश के साथ अपनी बातों पर विराम लगाया।