.
Tuesday, March 15, 2016

     

‘दस्तूरी की परम्परा नगर निगम के स्थापना काल से ही लागू की गयी सफाईकर्मियों से हर माह दो से तीन हजार रूपये वसूली जाती है ‘दस्तूरी’ दस्तूरी की रकम के बँटवारे में नीचे से ऊपर तक बँटता है सबका हिस्सा नगर में दस्तूरी प्रथा पर महपौर व नगर आयुक्त की चुप्पी संदेह के घेरे में



वदस्तूरी प्रथा के कायम रहते... कैसे  होगा स्वच्छ बनारस?


     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का देश भर मे भले ही प्रभावकारी असर देखने को मिल जाये लेकिन उनके अपने ही निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी की स्थिति बेहद शर्मनाक है। भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा दस लाख से अधिक निवासियों वाले ७३ शहरों में मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रभाव की जाँच की गयी। इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में देश के प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का स्थान सर्वाधिक गंदे शहरों मे आया हैं। ७३ शहरों की सर्वे रिपोर्ट मे वाराणसी का ६५वाँ रैंक आया है जो कि आश्चर्यजनक है जबकि २०१४ के लोक सभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से ७१सीटें पाकर नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि ‘यह राज्य मे विकास के नये युग की शुरूआत है। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी मे गंगा नदी को भी साफ करने का वादा किया था। परन्तु मोदी के इन वादों की नौका को उनके ही निर्वाचन क्षेत्र बनारस में भाजपा के ही जन प्रतिनिधियों ने डूबोने मे कोई कसर बाकी नही छोड़ी। जिनकी मौन सहमति पर वाराणसी नगर निगम में वर्षोंं से बदस्तूर जारी है दस्तूरी प्रथा और शहर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

      दरअसल देश के प्रधान मंत्री व वाराणसी के सांसद नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में स्वच्छता अभियान में सबसे बड़ी एवं मुख्य बाधा कोई है तो वह दस्तूरी प्रथा है। वास्तव में मोदी जी के द्वारा चलाया गया स्वच्छता अभियान काबिले तारीफ है क्योंकि नगर का हर व्यक्ति अपने आस-पास साफ सफाई पंसद करता है, यही वजह है कि प्रत्येक भवन स्वामी चाहे खास हो या आम हो हर कोई नगर निगम को नगर की सुचारू व्यवस्था के एवज में सीवर कर,जल कर,भवन कर,इत्यादि का भुगतान करता है ताकि गली, मुहल्ला, सड़क, कालोनी, गंगा घाट स्वच्छ व सुन्दर दिखायी दें। लेकिन ऐसा तभी संभव हो सकता है जब नगर निगम के सफाई कर्मियों से दस्तूरी वसूलने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाकर उनसे ईमानदारी पूर्वक उनकी पूरी ड्यूटी करायी जाए। नगर निगम वाराणसी में सफाई कर्मियों से प्रत्येक माह दस्तूरी वसूलने की परम्परा नगर निगम की स्थापना के समय से ही प्रारम्भ हो गयी थी। इस बात की पुष्टी नगर निगम वाराणसी के उप प्रशासक के पद पर तैनात रह चुके श्री दीपक मधोक भी करते हैं जो वर्तमान में सनबीम समूह के कुशल प्रबन्ध निदेशक के पद को सम्भाले हुये है। श्री मधोक का स्पष्ट कहना है कि बनारस शहर पिछले तीन दशक में बहुत पीछे चला गया। इसकी एक बड़ी वजह है, नौकरशाही पर अंकुश रखने वाले सक्षम नेताओं से इस शहर का खाली हो जाना। काम करने व कराने के मोर्चोंं पर ज्ञानी ज्यादा हो गयें हैं और करने वालों का अकाल सा पड़ गया है। श्री मधोक न कुछ कहते हुये भी भ्रष्टाचार के आगोश में आकन्ठ डूबे नौकर शाहों और जन प्रतिनिधियों की ओर ईशारा करते हुये सब कुछ कह दिया। सम्भवत: मधोक जी ने दबी जुबान सफाई कर्मियों से हर माह वसूले जाने वाली रकम (दस्तूरी) की ओर भी ईशारा कर दिया। मधोक जी का यह बयान जनवरी माह में वाराणसी से प्रकाशित होने वाले एक दैनिक समाचार में प्रकाशित हुआ। मधोक जी के बयान की पुष्टी पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी श्री धीरेश्वर चतुर्वेदी के इस बयान से भी होती है जिसमें उन्होंने कहा कि ‘सफाई व्यवस्था में भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। ‘अपना-अपना नाम प्रकाशित न किये जाने की शर्त पर विभिन्न क्षेत्रों में तैनात सफाई कर्मी दस्तूरी देने की बात स्वीकार करते हैं।’ इन सफाई कर्मियों की माने तो जब छठवाँ वेतन आयोेग लागू नहीं था तब उस वक्त वेतन मिलते ही हर माह दस्तूरी की रकम के रूप में पाँच सौ रूपये से एक हजार रूपये तक क्षेत्रिय सुपरवाइजरों के माध्यम से वसूली करायी जाती थी और जब से वेतन बढ़ा है तब से प्रत्येक सफाईकर्मी से हर माह दो हजार रूपये से तीन हजार रूपये तक की दस्तूरी नगर स्वास्थ्य अधिकारी का नाम बता कर वसूला जाता है इसके बदले में इन सफाई कर्मियों को यह सुविधा दी गई कि है कि ये आधे वक्त क्षेत्र में काम करके अपने घर को लौट जाते है लेकिन इन लोगों की हाजिरी पूरे वक्त की लगाई जाती है। इनके वेतन का एक हिस्सा जो निगम प्रशासन द्वारा वसूला जाता है उसके एवज में ही इनके विरुद्ध किसी प्रकार की कोई विभागी कार्यवाही नहीं की जाती है।

     नगर निगम वाराणसी में वर्तमान समय में लगभग चार हजार सफाई कर्मचारी स्थायी रूप से और सैकड़ों कर्मचारी अस्थाई रूप से कार्यरत हैं स्थायी सफाईकर्मियों से दो से तीन हजार रूपये और अस्थायी सफाईकर्मी जिन्हें लगभग पैंतीस सौ रूपये वेतन हर माह प्राप्त होते है उनसे भी पाँच सौ रूपये से आठ सौ रूपये तक हर माह दस्तूरी वसूली जाती है। कुल मिलाकर लाखों रूपये की एक बड़ी रकम दस्तूरी के रूप में प्रतिमाह केवल सफाईकर्मियों से वसूला जाता है। स्वास्थ्य विभाग में दस्तूरी की परम्परा (कमीशन, दलाली, घूसखोरी ) नौकरशाहों एवं तथाकथित जन प्रतिनिधियों की मिलीभगत से नगर निगम के स्थापना काल से ही लागू की गयी हैं। जो आज भी बदस्तूर जारी हैं। अहम बात यह है कि क्षेत्रिय सुपरवाईजर, सेनेटरी इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य अधिकारी के बस की ही बात नहीं है कि हर माह वसूली जाने वाली दस्तूरी की रकम ये अकेले पचा सके । वाराणसी नगर निगम में दस्तूरी के रकम के बँटवारे में नीचे से ऊपर तक सबका हिस्सा बँटता है जिसमें कुछ तथाकथित भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों से लेकर नौकरशाहों तक का हिस्सा तय होता है। निर्धारित की गयी रकम प्रत्येक माह बड़े ही ईमानदारी के साथ भ्रष्टाचारियों तक पहँुचा दिया जाता हैं। ऐसे में मोदी जी का स्वच्छता अभियान कम से कम वाराणसी में तो सफल होना असम्भव सा लगता है तब कि जब मोदी जी सांसद चुने जाने के पूर्व ही अपने भाषणों में बराबर कहा करते थे कि न मैं खाऊगां और न खाने दूँगा । मतलब कि न तो भ्रष्टाचार करूँगा और नही करने दूँगा । बावजूद इसके चुनाव जीत कर प्रधान मंत्री बने दो वर्ष होने को है। लेकिन दशकों से भ्रष्टाचार की आगोश में आकन्ठ डूबे नगर निगम वाराणसी के नौकरशाहों एवं भ्रष्टाचारी किस्म के जनप्रतिनिधियों पर मोदी जी के बातों का कोई असर नहीं पड़ा। विचारणीय प्रश्न यह है कि वाराणसी नगर निगम में महापौर के पद पर स्वालेह अन्सारी के बाद से अब तक भाजपा के ही महापौर ही चुने गये हैं और वर्तमान समय में भी भाजपा के महापौर श्री राम गोपाल मोहले हैं। नगर के तीनों विधायक व एम०एल०सी० भी भाजपा से ही है जो कि मिनी सदन के सम्मानित सदस्य हैं। खास बात यह है कि वाराणसी के सांसद नरेन्द्र मोदी भी नगर निगम वाराणसी के मिनी सदन में विशेष आमंत्रित सदस्य हैं, जिन्हें निगम कार्यकारिणी वेâ चुनाव में मतदान करने का अधिकार भी प्राप्त है बावजूद इसके सफाईकर्मियो से दस्तूरी वसूलने की प्रथा को आज तक बंद न किया जाना आश्चर्यजनक है। क्या मोदी जी को इस बात की भनक अभी तक न मिल सकी कि उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आज भी सफाईकर्मियों से पुरानी परम्परा के तहत दस्तूरी वसूली जा रही है जिसकी वजह से सफाईकर्मी अपनी जिम्मेदारी के प्रति ईमानदार नहीं है। दस्तूरी प्र्रथा के कायम रहते यदि भाजपा के जनप्रतिनिधि मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की बात करते हैं तो यह बात कुछ हजम नहीं होती। बहरहाल दस्तूरी प्रथा के चालू रहते वाराणसी में मोदी जी का स्वच्छता अभियान सफल होता नहीं दिखाई दे रहा है।