…जहाँ अंतिम सांस के साथ लोग खोजते हैं मोक्ष का रास्ता

…जहाँ अंतिम सांस के साथ लोग खोजते हैं मोक्ष का रास्ता

काशी का अनोखा ‘मुक्ति भवन, देश-विदेश से आते हैं लोग
अंतिम समय भगवान शिव की नगरी में बिताने की रहती है इच्छा
आध्यात्मिक वातावरण के बीच जीवन के अंतिम पड़ाव को शांति से जीते हैं लोग

वाराणसी (रणभेरी): मोक्ष की नगरी काशी में जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी भी आस्था से भरी हुई है। यहाँ गंगा के घाट, मंदिरों की घंटियाँ और “हर-हर महादेव” के उद्घोष के बीच एक ऐसी जगह भी है, जहाँ लोग जीवन के अंतिम पड़ाव को शांति और आध्यात्मिक विश्वास के साथ बिताने आते हैं। यह जगह है काशी का प्रसिद्ध “मुक्ति भवन”, जो वर्षों से उन लोगों के लिए आशा और आस्था का केंद्र बना हुआ है जो मानते हैं कि काशी में अंतिम सांस लेने से आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वाराणसी के लक्सा क्षेत्र में चारु चंद्र मिशन अस्पताल के पास स्थित यह भवन अपनी अनोखी परंपरा के कारण देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में जाना जाता है। यहाँ आने वाले लोग किसी इलाज के लिए नहीं बल्कि अपनी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए आते हैं। मान्यता है कि काशी में देह त्यागने से जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है। इसी विश्वास के चलते देश के अलग-अलग राज्यों से लोग अपने बुजुर्ग परिजनों को यहाँ लेकर आते हैं ताकि वे अपने जीवन के अंतिम क्षण भगवान शिव की नगरी में बिता सकें।

…जहाँ अंतिम सांस के साथ लोग खोजते हैं मोक्ष का रास्ता

मुक्ति भवन में प्रवेश करते ही एक अलग ही वातावरण का अनुभव होता है। यहाँ अस्पताल जैसी भागदौड़ या मशीनों की आवाज नहीं सुनाई देती, बल्कि भजन, मंत्रोच्चार और प्रार्थना की मधुर ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है। साधारण कमरों और सादगीपूर्ण व्यवस्था के बीच यहाँ रहने वाले लोग अपने जीवन के अंतिम दिनों को शांति और श्रद्धा के साथ बिताते हैं। परिवार के सदस्य भी उनके साथ रहते हैं और उनकी सेवा में लगे रहते हैं।

मुक्ति भवन के प्रबंधकों के अनुसार यहाँ रहने के लिए सीमित समय दिया जाता है ताकि अधिक से अधिक लोगों को अवसर मिल सके। कई बार ऐसा भी होता है कि किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य कुछ समय के लिए बेहतर हो जाता है और उसे वापस घर लौटना पड़ता है। लेकिन इसके बावजूद लोग मानते हैं कि काशी में बिताया गया हर क्षण आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण होता है।

मुक्ति भवन से जुड़े एक कर्मचारी ने बातचीत में बताया कि यहाँ आने वाले अधिकांश लोग अपनी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि “हम यहाँ आने वाले हर व्यक्ति को मरीज नहीं बल्कि अतिथि मानते हैं। कोशिश रहती है कि उनके अंतिम समय में उन्हें शांति, सम्मान और आध्यात्मिक वातावरण मिले।” उनका कहना है कि कई बार परिवार के लोग भी यहाँ आकर भावुक हो जाते हैं, लेकिन काशी का माहौल उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

…जहाँ अंतिम सांस के साथ लोग खोजते हैं मोक्ष का रास्ता

यहाँ रहने वाले लोगों और उनके परिजनों की कहानियाँ भी बेहद मार्मिक होती हैं। कोई बुजुर्ग अपने जीवन के लंबे सफर के बाद यहाँ आकर भगवान का स्मरण करता है, तो कोई परिवार अपने प्रियजन की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए दूर-दराज से काशी पहुँचता है। कई लोग बताते हैं कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वे काशी में ही अंतिम सांस लें, इसलिए वे उन्हें यहाँ लेकर आए हैं। मुक्ति भवन में दिन की शुरुआत आमतौर पर भजन और मंत्रोच्चार से होती है।

कई लोग सुबह गंगा घाटों पर जाकर दर्शन करते हैं और वहाँ की आरती में शामिल होते हैं। दिनभर धार्मिक ग्रंथों का पाठ, प्रार्थना और ध्यान का माहौल बना रहता है। यहाँ आने वाले लोग जीवन और मृत्यु के गहरे अर्थों पर विचार करते हैं और ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। काशी का यह अनोखा भवन दुनिया के लिए भी एक अलग उदाहरण पेश करता है।

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