वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के दालमंडी इलाके में चल रहे चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए समाजवादी पार्टी ने प्रतिनिधिमंडल भेजने की घोषणा की थी, लेकिन उससे पहले ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया और कई सपा नेताओं को घरों में नजरबंद कर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल को दालमंडी जाने की अनुमति नहीं
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने 11 सदस्यीय टीम का गठन किया था। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल को सौंपा गया। टीम का उद्देश्य दालमंडी पहुंचकर ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों का हाल जानना था।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि दालमंडी क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश प्रतिबंधित है। एहतियातन कई सपा नेताओं के घरों के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

नेताओं ने लगाया तानाशाही का आरोप
सपा नेता सत्यप्रकाश सोनकर के आवास पर लंका पुलिस पहुंची और उन्हें घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी गई। सोनकर ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि पीड़ितों से मिलने पर रोक लगाना सरकार की तानाशाही है।
इसी तरह सपा नेता अमन यादव को भी देर रात हाउस अरेस्ट किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार नजरबंद किए जाने से उनकी नौकरी पर भी खतरा मंडरा रहा है। उनका कहना था कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
215 करोड़ की परियोजना, 181 मकान जद में
दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के तहत 650 मीटर लंबी सड़क को करीब 60 फीट (लगभग 17.5 मीटर) चौड़ा किया जाना है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम दिन 215 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, जिसमें से 2 करोड़ रुपये जारी भी किए जा चुके हैं।
पीडब्ल्यूडी के अनुसार अब तक 181 मकानों की पैमाइश हो चुकी है। इनमें से 40 से अधिक मकानों की रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है और करीब 20 मकानों का ध्वस्तीकरण किया जा चुका है। परियोजना की जद में 6 मस्जिदें भी आ रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक कुल मुआवजा राशि लगभग 191 करोड़ रुपये आंकी गई है।
आजीविका पर संकट की आशंका
सरकारी आंकड़ों के अनुसार दालमंडी में लगभग 1400 दुकानें हैं, जबकि स्थानीय व्यापारियों का दावा है कि यहां करीब 10 हजार छोटे-बड़े प्रतिष्ठान संचालित होते हैं। इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।
व्यापारियों का कहना है कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन 17 मीटर चौड़ी सड़क की जरूरत पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका सुझाव है कि सीमित चौड़ीकरण कर कारोबार को कम से कम नुकसान पहुंचाया जाए।
जून 2026 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य
परियोजना के तहत सड़क के दोनों ओर 15-15 फुट की पटरी बनाई जाएगी और बिजली, सीवर व जलापूर्ति की लाइनें भूमिगत की जाएंगी। तारों के जाल को भी हटाया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने जून 2026 तक कार्य पूर्ण कर कार्यदायी संस्था को सौंपने का लक्ष्य तय किया है।
दालमंडी में विकास बनाम विस्थापन की यह बहस अब सियासी रंग ले चुकी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के आसार हैं।
