- पीपीटी-सीटी व एसटीआई काउंटर पर ताला, एमएस बोले- निर्देश के बाद भी खाली नहीं किया गया
- मरीजों के सामने तीखी बहस, वीडियो बनाने पर भी उठा सवाल
वाराणसी (रणभेरी)। बीएचयू अस्पताल के एमसीएच विंग में शुक्रवार को उस समय असहज स्थिति बन गई जब अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) प्रो. केके गुप्ता और स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता राय के बीच पीपीटी-सीटी और एसटीआई काउंटर को लेकर तीखी बहस हो गई। मामला इतना बढ़ा कि एमएस ने संबंधित कक्ष में ताला लगवा दिया। यह पूरा घटनाक्रम मरीजों और तीमारदारों के सामने हुआ, जिससे अस्पताल परिसर में हलचल मच गई।
जानकारी के अनुसार एमसीएच विंग की ओपीडी के बाहर महिलाओं के बैठने की व्यवस्था के पास एक काउंटर संचालित होता है, जहां ओपीडी पर्ची बनाने और ब्लड सैंपल लेने का कार्य किया जाता है। इसी परिसर में पीपीटी-सीटी (प्रिवेंशन ऑफ पैरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन ऑफ एचआईवी/एड्स) और एसटीआई (सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन) क्लीनिक भी संचालित हैं। ये दोनों सेवाएं एचआईवी और यौन संचारित रोगों की स्क्रीनिंग, काउंसिलिंग और जांच से जुड़ी हैं, जो संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक एमएस प्रो. गुप्ता ने करीब 15 दिन पहले इस काउंटर को खाली कराने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को वे टीम के साथ निरीक्षण के लिए पहुंचे तो काउंटर पूर्ववत संचालित मिलता दिखा। इस पर उन्होंने कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल काउंटर खाली कराने को कहा।
इसी दौरान एक कर्मचारी द्वारा वीडियो बनाए जाने पर भी सवाल उठा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एमएस सीधे ओपीडी में बैठीं विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता राय के पास पहुंचे और पूछा कि क्या उनके निर्देश पर वीडियो बनाया जा रहा है। इस पर प्रो. राय ने कहा कि यदि कोई कार्रवाई नियमों के विरुद्ध होगी तो उसका रिकॉर्ड रखा जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि काउंटर खाली कराया जा रहा है तो उसके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना जरूरी है, अन्यथा मरीजों की स्क्रीनिंग और जांच प्रभावित होगी।
विभागाध्यक्ष ने बाद में विभागीय चिकित्सकों और कर्मचारियों के साथ बैठक की। बैठक में यह बात सामने आई कि पीपीटी-सीटी और एसटीआई केंद्र केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत संचालित हैं। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के काउंटर बंद करना मरीजों के हित में नहीं होगा।
दूसरी ओर, एमएस का कहना था कि काउंटर खाली करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका था और उसका पालन नहीं किया गया। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था और स्थान के बेहतर उपयोग का हवाला दिया।
करीब आधे घंटे तक चली इस तनातनी के बाद एमएस ने संबंधित कक्ष में ताला लगवा दिया। मरीजों और तीमारदारों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा का माहौल रहा। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रशासनिक निर्णयों और स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता राय का कहना है कि गर्भवती महिलाओं सहूलियत के लिए ही एमसीएच विंग मे जांच कराई जाती है। अस्पताल के एमएस और उनके साथ आये कर्मचारियों ने जिस तरह से जांच किट सहित अन्य सामानों को बाहर फेंका, वह निंदनीय है।
आईएमएस निदेशक सहित अन्य लोगों को जानकारी दी जा चुकी है। वहीं आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एस एन संखवार का कहना है कि प्रो. संगीता राय ने मामले की जानकारी दी थी। डिप्टी चीफ प्रॉक्टर को भेजकर मामला शांत कराया गया। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। साथ ही दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत की जाएगी।
