वाराणसी में गंगा तट पर विकसित हुआ विशाल मियावाकि वन, प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में सराहा

वाराणसी में गंगा तट पर विकसित हुआ विशाल मियावाकि वन, प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में सराहा

वाराणसी (रणभेरी): डोमरी गांव में गंगा किनारे विकसित किए जा रहे मियावाकि वन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें संस्करण में सराहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक घंटे के भीतर 2.51 लाख पौधों का रोपण कर वाराणसी नगर निगम ने वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया, जो जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब समाज के हर वर्ग के लोग एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। उन्होंने इस अभियान को ‘एक पेड़ मां के नाम’ से जोड़ा और देशवासियों को इससे प्रेरणा लेने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि काशी ने अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोते हुए पर्यावरण संरक्षण जैसे वैश्विक मुद्दों में भी नेतृत्व क्षमता दिखाई है। इस महाभियान की सफलता पीछे महीनों की योजना और हजारों लोगों की मेहनत थी। इसमें सेना, एनडीआरएफ, यूपी पुलिस, एनसीसी कैडेट्स, स्वयंसेवी संगठन और स्कूली बच्चे भी शामिल थे, जिन्होंने इसे एक वास्तविक जन आंदोलन बना दिया।

वाराणसी में गंगा तट पर विकसित हुआ विशाल मियावाकि वन, प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में सराहा

महापौर और नगर आयुक्त ने जताई खुशी

वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने कहा कि इस ऐतिहासिक प्रयास को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलना गर्व की बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन को इस उपलब्धि का मुख्य कारण बताया।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि डोमरी-सूजाबाद क्षेत्र में केवल एक घंटे में 2.51 लाख पौधों का रोपण नगर निगम की सटीक योजना और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण सुधार में मदद करेगी बल्कि भविष्य में नगर निगम के लिए आत्मनिर्भर आर्थिक मॉडल का रूप भी लेगी।

वाराणसी में गंगा तट पर विकसित हुआ विशाल मियावाकि वन, प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में सराहा

पर्यावरण और आर्थिक दोनों का विकास

इस वन में शीशम, सागौन, बांस जैसी 27 देशी प्रजातियां के साथ आम, अमरूद जैसे फलदार और अश्वगंधा, गिलोय जैसी औषधीय पौधों का रोपण किया गया है। नगर आयुक्त ने बताया कि स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और ड्रोन निगरानी से पौधों की देखभाल की जा रही है। पूरे 350 बीघा क्षेत्र को 60 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जिनके नाम काशी के प्रमुख घाटों पर रखे गए हैं।

एमबीके संस्था के सहयोग से तीसरे वर्ष से नगर निगम को इस परियोजना से 2 करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक बढ़कर 7 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। नगर निगम के इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि जब जनता और प्रशासन एकजुट हो, तो बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

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