वाराणसी (रणभेरी): थाना स्तर पर लंबित विवेचनाओं और कार्य में लापरवाही को लेकर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बड़ा कदम उठाते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। जांच में 60 दिनों से अधिक समय तक मामलों को लंबित रखने और अपेक्षित कार्रवाई न करने पर कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर थानों में तैनात एक इंस्पेक्टर सहित कुल 12 उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को पुलिस कमिश्नर ने तीनों थानों कैंट, शिवपुर और लालपुर-पांडेयपुर के अर्दली रूम की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान लंबित विवेचनाओं, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संकलन, गैर-जमानती वारंटों के तामिले, वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी और बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर की गई कार्रवाई जैसे मामलों की प्रगति की जांच की गई।
समीक्षा में यह सामने आया कि कई मामलों में विवेचक 60 दिन से अधिक समय तक जांच को आगे नहीं बढ़ा पाए और कार्रवाई में गंभीर शिथिलता बरती गई। इस पर नाराजगी जताते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई का निर्देश दिया।
कैंट थाने से इंस्पेक्टर संतोष पासवान समेत पांच उपनिरीक्षकों को निलंबित किया गया है। वहीं शिवपुर थाने से तीन और लालपुर-पांडेयपुर थाने से तीन उपनिरीक्षकों को भी निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है।
इसके साथ ही सभी निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति भी कर दी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि किन कारणों से विवेचनाएं लंबे समय तक लंबित रहीं और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली में क्या खामियां थीं। साथ ही उनका सेवा रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा।
थानों में मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद संबंधित थानों और पुलिस विभाग में हलचल का माहौल देखा गया। अधिकारियों के स्तर पर की गई इस सख्त कार्रवाई को अनुशासन सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
क्या होता है अर्दली रूम
पुलिस विभाग में अर्दली रूम वह औपचारिक प्रक्रिया होती है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्यों, शिकायतों, अनुशासन और लंबित मामलों की समीक्षा करते हैं। यह व्यवस्था प्रशासनिक नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है।
