रंगों में रची आध्यात्मिकता, शब्दों में सजी संवेदना

रंगों में रची आध्यात्मिकता, शब्दों में सजी संवेदना

अशोका इंस्टीट्यूट में पुस्तक विमोचन संग सजी बहुरंगी चित्रकला प्रदर्शनी
स्थानीय कलाकारों की कृतियों ने आधुनिकता और आध्यात्मिकता का रचा संवाद

वाराणसी (रणभेरी): सांस्कृतिक नगरी काशी में कला और साहित्य का अद्भुत समागम देखने को मिला, जब अशोका इंस्टीट्यूट के प्रांगण में चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत की पुस्तक सपनों की पगडंडियां के विमोचन अवसर पर सजी इस प्रदर्शनी ने रंगों और शब्दों के अनूठे संवाद को साकार कर दिया। प्रदर्शनी का संयोजन चर्चित चित्रकार पूनम राय ने किया।

इसमें बनारस के सुप्रसिद्ध कलाकारों की कृतियाँ आकर्षण का केंद्र रहीं। अमित मेहता के चित्रों में पारंपरिक विषयों को आधुनिक दृष्टि से प्रस्तुत किया गया, जहाँ प्रकाश और छाया का संतुलन दर्शकों को देर तक ठहरने पर विवश करता रहा। वहीं सुनील कुमार मौर्य की काशी विषयक अमूर्त कृति में गहरे नीले और काले रंगों के बीच उभरते लाल शिखर शहर की आध्यात्मिक ऊर्जा को व्यक्त करते दिखे।

रंगों में रची आध्यात्मिकता, शब्दों में सजी संवेदना

निवेक्षा राय की ‘द इंटरनल फ्लूट’ में भगवान कृष्ण का ज्यामितीय और आधुनिक रूप प्रभावशाली रहा। उनकी स्त्री-आधारित कृतियों में संवेदनशीलता और मिश्रित माध्यम का सशक्त प्रयोग दिखाई दिया। रिजवान खान ने श्वेत-श्याम माध्यम में गौतम बुद्ध की ध्यानमग्न छवि प्रस्तुत कर सादगी में आध्यात्मिक गहराई को उकेरा। अनुष्का मौर्य और स्नेहा राय की कृतियों में आत्म-जागरण, योग और भक्ति के विविध आयाम साकार हुए।

प्रदर्शनी का उद्घाटन नवभारत टाइम्स के संपादक सुधीर मिश्र और अमृत विचार के प्रधान संपादक राजेश सिंह श्रीनेल ने किया। बड़ी संख्या में कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और साहित्यकारों की उपस्थिति ने आयोजन को सृजनात्मक उत्सव में बदल दिया।

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