इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते..

इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते..

ज्ञानवापी मोड़ के जाम से अभी तक नहीं मिला लोगों को छुटकारा
पुलिस कमिश्नर के आदेश की रोज उड़ायी जाती है धज्जियां
एक बार फिर वीआईपी गाड़ियां बनी जाम की वजह
सुबह हो या शाम या रात रोजाना रहता है जाम ही जाम
जाम में फंसना है तो तो ज्ञानवापी की ओर न जायें
जाम में घंटों फंस कर कराहते रहते हैं आमजन

राधेश्याम कमल

वाराणसी (रणभेरी): प्रख्यात गीतकार गुलजार के गीत की दो लाइन है- इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते..। शायद यह पंक्तियां ज्ञानवापी मोड़ के लिए एकदम सटीक बैठती है। ज्ञानवापी मोड़ की ताजा स्थिति यह हैल कि अगर इस मार्ग से कोई गुजरा तो फिर शायद इस ओर आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। एक कहावत है जैसे-जैस दवा की दर्द बढ़ता ही गया।

यह कहावत भी शहर के सबसे व्यस्ततम एवं मुख्य रोड ज्ञानवापी मोड़ पर लागू होता है। ज्ञानवापी मोड़ के जाम से आम नागरिकों को अभी तक छुटकारा नहीं मिल सका है। हालांकि इस जाम से निजात पाने के लिए क बार कोशिशें की गई। लेकिन हर बार यह कोशिशें नाकाम साबित हुई। इस जाम से निजात पाने के लिए पुलिस कमिश्नर ने खुद कोशिश की और पिछले दिनों उन्होंने आदेश दिया कि अब ज्ञानवापी मोड़ पर वीआईपी गाड़ियां खड़ी नहीं होगी।

वीआईपी गाड़ियां अब मैदागिन पर ही खड़ी कर दी जायेगी। मैदागिन से सभी अधिकारी व वीआईपी पैदल ही ज्ञानवापी की ओर आयेंगे। पुलिस कमिश्नर के इस आदेश का कुछ दिनों तक अनुपालन किया गया लेकिन बाद में वही हुआ जिसका सभी को डर था। कुछ दिनों तक ज्ञानवापी मोड़ पर वीआईपी गाड़ियां का मूवमेंट एकदम बंद रहा। तब आम नागरिकों ने काफी राहत की सांस ली थी। तब काफी लोगों ने इसकी तारीफ की।लेकिन शायद वीआईपी लोगों को यह आदेश रास नहीं आया।

इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते..

आखिरकार वही हुआ जिसका सभी को अंदेशा था। कुछ दिन थमने के बाद सब कुछ उसी पुराने ढर्रें पर चलने लगा।
अब वर्तमान में हालात यह है कि इस ज्ञानवापी मोड़ की स्थिति सबसे बदतर है। अमूनन इस मोड़ से कोई भी गुजरना नहीं चाहता। क्योंकि इस मोड़ से गुजरने का मतलब है खुद को जाम के मकड़जाल में फंसाना। हालात यह है कि चौक से लेकर ज्ञानवापी, बांसफाटक, भंडारीगली, गोदौलिया तक भीड़ ठसाठस भरी रहती है।

गोदौलिया से बांसफाटक-ज्ञानवापी की ओर लोग जाते रहते हैं और इतनी ही संख्या में मैदागिन से नीचीबाग, चौक, ज्ञानवापी की ओर लोग आते रहते हैं। इस भीड़ में ेसा नहीं है कि इसमें सिर्फ बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने वाले दर्शनार्थी ही रहते हैं। इस भीड़ में दर्शनार्थी तो रहते ही है, साथ ही साथ बनारस शहर के वाशिंदे भी शामिल रहते हैं। इनमें स्कूल-कॉलेजों के आते-जाते छात्र- छात्राएं, अफिसों से लौटते हुए लोग, खरीदारी करने निकली महिलाएं भी रहती हैं।

लेकिन ये सभी लोग इस जा की गिरफ्त में फंस कर खुद को कोसते हुए वहां से जितनी जल्दी हो निकलने की कोशिश करते हैं। इस जाम के मकड़जाल में एक बार जो फंसा तो घटों उसमें से निकलना मुश्किल हो जाता है। 13 मार्च शुक्रवार की शाम 5.30 बजे ज्ञानवापी मोड़ की स्थिति इतनी बदतर थी कि हर कोई इस जाम में फंस कर अपनी किस्मत को कोसते रहे।

चौक की ओर से (मणिकर्णिका गेट की तरफ) एक लाइन से कई वीआईपी गाड़ियां ज्ञानवापी तक खड़ी कर दी गई थी। काशी विश्वनाथ गेट नंबर चार के सामने दो वीआईपी गाड़ियां खड़ी थी। बांसफाटक फूलमंडी (सत्यनारायण मंदिर के समीप) के पास भी उत्तर प्रदेश शासन की एक वीआईपी गाड़ी भीड़ को चीरते हुए हार्न पर हार्न बजाये जा रही थी लेकिन बेचारे निरीह नागरिक भला इस भीड़ में कैसे आगे बढ़ रहे थे यह तो उन्हीं से जाना जा सकता है। एक वीआईपी गाड़ी पर तिरंगा भी फहरा रहा था। इस जाम में फंसे लोग कमेंट्स पर कमेंट्स देते जा रहे थे। हुआ यह कि ज्ञानवापी मोड़ पर सड़क के दोनों ओर वीआई गाड़ियों को खड़ा कर दिये जाने के चलते सड़क पर पैदल या फिर दुपहिया वाहनों को आगे ले जाने के लिए जगह ही नहीं बची थी। लोग अपनी-अपनी गाड़ियां बंद करक पैरों के सहारे धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे।

पूरा का पूरा इलाका कई घंटे तक जाम में फंसा रहा। मजे की बात तो यह है कि गेट नंबर चार ज्ञानवापी पर इतनी पुलिस फोर्स तैनात रहती है लेकिन इन पुलिसकर्मियों को इस जाम से कुछ लेना देना नहीं है। दुपहिया वाहनों पर सवार लोग इसी भीड़ में फंस कर किसी प्रकार आगे बढ़ रहे थे। ज्ञानवापी मोड़ पर यह समस्या एक दिन का नहीं बल्कि रोज का है। सुबह होते ही काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन करने के लिए रोजाना लाखों की भीड़ जुटती है। यह सिलसिला सुबह से लेकर रात्रि तक अनवरत चलता रहता है। इसी भीड़ में वीआईपी गाड़ियों का काफिला भी बाबा दरबार में आता रहता रहता है। वीआईपी गाड़ियों के ड्राइवर परिसर में गाड़ी न ले जाकर ज्ञानवापी मोड़ गेट नंबर चार के सामने ही खड़ी कर देते हैं।

तब तक घंटों लोग इस जाम में फंसे रहते रहते हैं। जबकि ज्ञानवापी मंदिर परिसर में वीआईपी गाड़ियों को खड़ी करने जगह बनायी गई है। लेकिन कोई भी एसा नहीं करता है। इन इलाकों में भारी जाम के चलते वैसे तो महिलाओं ने इधर आना एकदम बंद कर दिया है। लेकिन जिनको आवश्यक कार्य है उसे यहां तो आना ही पड़ेगा। कई बार तो हालत इतनी दयनीय हो जाती है कि आम नागरिकों का यहां से पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। व्यापारियां का मानना है कि ज्ञानवापी मोड़ पर जाम का सबसे मुख्य कारण पुलिस व वीआईपी गाड़ियों का अनावश्यक रूप से पार्किंग है। काशी विश्वनाथ मंदिर में रोजाना वीआईपी गाड़ियों के अलावा सरकारी अधिकारियों का भी हमेशा आना-जाना लगा रहता है।

Share this news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *