वाराणसी (रणभेरी): केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत काशी क्षेत्र में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। बिजली विभाग के अनुसार अब तक शहर में लाखों उपभोक्ताओं के घरों पर ये मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे बिजली उपभोग और भुगतान प्रणाली अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बन रही है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक शंभु कुमार ने जानकारी दी कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को प्रीपेड रिचार्ज प्रणाली अपनानी होगी। इसमें उपभोक्ताओं को बिजली दरों में लगभग 2 प्रतिशत तक की छूट भी दी जा रही है। साथ ही, कम बैलेंस या बैलेंस समाप्त होने की सूचना उपभोक्ताओं को एसएमएस के माध्यम से समय-समय पर मिलती रहेगी।

1.74 लाख से अधिक मीटर लगाए गए
अधिकारियों के मुताबिक काशी क्षेत्र में अब तक 1.74 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में करोड़ों उपभोक्ताओं तक इस योजना को पहुंचाने के लिए अलग-अलग एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। काशी क्लस्टर में ही लाखों मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अच्छी प्रगति दर्ज की गई है।
सोलर उपभोक्ताओं के लिए भी लाभ
यदि कोई उपभोक्ता अपने घर पर सोलर प्लांट लगाता है, तो मौजूदा स्मार्ट मीटर को ही आसानी से नेट मीटर में बदला जा सकता है। इससे सौर ऊर्जा उपयोग करने वालों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।
बकाया राशि का आसान समायोजन
नए मीटर लगने पर पहले जमा सुरक्षा राशि को उपभोक्ताओं के खाते में समायोजित किया जाएगा। यदि कोई बकाया नहीं है तो यह राशि सीधे प्रीपेड बैलेंस में जुड़ जाएगी। वहीं पुराने बकाए को भी एकमुश्त देने के बजाय हर रिचार्ज में 10 से 25 प्रतिशत तक किस्तों में समायोजित किया जाएगा।
रिचार्ज के कई विकल्प
उपभोक्ता अब बिजली रिचार्ज आसानी से ऑनलाइन कर सकते हैं। इसके लिए यूपीपीसीएल का आधिकारिक ऐप, वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे पेटीएम, गूगल प्ले और जन सेवा केंद्र उपलब्ध हैं।
बैलेंस खत्म होने पर भी मिलेगी राहत
स्मार्ट मीटर लगने के बाद शुरुआती 30 दिनों तक उपभोक्ताओं को विशेष राहत दी जा रही है। यदि बैलेंस समाप्त हो जाता है, तो भी तीन दिन तक बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। इसके अलावा शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे तक, रविवार और सरकारी छुट्टियों में भी सप्लाई बंद नहीं की जाएगी। बिजली विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल बिलिंग प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को अपने खर्च पर बेहतर नियंत्रण भी मिलेगा।
