वाराणसी (रणभेरी): स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शनिवार को गोमाता के सवाल पर एक बार फिर तीखा रुख अपनाया। उन्होंने देशभर के संतों, धर्माचार्यों और धार्मिक संगठनों से अपील की कि वे दस दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करें—वे गोमाता के समर्थन में हैं या नहीं। उनका कहना है कि इससे आगामी “धर्म संघर्ष” में पक्ष और विपक्ष की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
अखाड़ा परिषद पर भी उठाए सवाल
शंकराचार्य ने रविंद्र पुरी के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री के साथ बताया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यदि सभी अखाड़ों के साथ औपचारिक चर्चा हो चुकी है, तो उसका लिखित प्रस्ताव सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अन्यथा इसे व्यक्तिगत राय ही माना जाएगा। उन्होंने कहा कि सत्ता और सत्य में अंतर होता है—सत्ता के साथ भीड़ हो सकती है, लेकिन सत्य अकेला होकर भी प्रभावी रहता है।
‘राज्य माता’ घोषित करने की मांग
शंकराचार्य ने सीधे योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया कि वे सार्वजनिक रूप से गाय को ‘मां’ या ‘राज्य माता’ घोषित करें। उनका कहना था कि यदि राज्य का सर्वोच्च पद संभालने वाला व्यक्ति गाय को मां कहने में संकोच करता है, तो यह गो संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पर प्रश्नचिह्न है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गाय को सिर्फ पशु सूची में रखता है और जो उसे मां का दर्जा देता है, दोनों के दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर है।
‘धर्म युद्ध’ की चेतावनी
शंकराचार्य ने संतों, महात्माओं और विद्वानों से कहा कि वे तय समय सीमा के भीतर अपना पक्ष घोषित करें। इसके बाद गोरक्षा को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी अन्य धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि गोहत्या के मुद्दे पर है, और इसकी जिम्मेदारी हिंदू समाज के भीतर तय की जानी चाहिए।
‘असली-नकली हिंदू’ पर बयान
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि विचारों की स्पष्टता लाना है। जो व्यक्ति गाय को अपनी मां मानता है, वही उनके अनुसार सच्चे अर्थों में साथ खड़ा है। जो ऐसा नहीं कर पाता, वह उनके दृष्टिकोण से अलग पक्ष में माना जाएगा।
11 मार्च को लखनऊ में संतों की बैठक
शंकराचार्य ने घोषणा की कि 11 मार्च को लखनऊ में संत समाज की बड़ी बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि गो संरक्षण के नाम पर अब तक जो कदम उठाए गए—जैसे ‘गोदान’ नामक फिल्म को टैक्स फ्री करना या गोशालाओं के संबंध में निर्देश जारी करना—वे पर्याप्त नहीं हैं।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा में सरकार द्वारा दिए गए कुछ बयान वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
