- 2018 से अब तक हत्या, फायरिंग, दुष्कर्म और सैकड़ों चोरी की घटनाएं
- 2019-2023 के बीच 271 चोरी और 13 छेड़खानी के मामले दर्ज, आरटीआई में खुलासा
- भारी सुरक्षा बजट के बावजूद 21 फरवरी 2026 को बिरला हॉस्टल के सामने फिर चली गोलियां
वाराणसी (रणभेरी) : देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2018 से लेकर अब तक कैंपस के भीतर हुई घटनाओं की लंबी फेहरिस्त बताती है कि परिसर लगातार अपराधियों के निशाने पर रहा है, लेकिन सुरक्षा तंत्र प्रभावी रोकथाम में नाकाम साबित हुआ है। सबसे पहले 2018 में सैकड़ों क्विंटल चंदन के हरे पेड़ों की कटाई कर चोरी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी थी। इसके बाद मार्च 2019 में कैंपस के भीतर कई राउंड फायरिंग हुई। 2 अप्रैल 2019 को बिरला चौराहे पर छात्र गौरव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पूरे विश्वविद्यालय समुदाय को झकझोर देने वाली थी।
इसी क्रम में लॉ फैकल्टी के पास एक चाय विक्रेता की सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, चीफ प्रॉक्टर कार्यालय के समीप सुरक्षा कर्मियों के बैरक स्थित गुलमोहन परिसर में एक महिला की हत्या कर शव पेड़ से लटका मिला। यह घटनाएं बताती हैं कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद रहे।

वर्ष 2021 में फिजिकल एजुकेशन के छात्र मुकेश पांडे पर बिरला क्षेत्र में कई राउंड गोलियां चलाई गईं। कैंपस के अंदर एनसीसी की एक छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना ने सुरक्षा तंत्र की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। नवीन छात्रावास के पास भी छात्रा से दुष्कर्म का मामला सामने आया। बाद में फिर चंदन के कई क्विंटल पेड़ काटकर चोरी कर लिए गए।
एक बस में छात्रा के साथ दुष्कर्म का प्रयास और छेड़खानी, आईआईटी की छात्रा के साथ कैंपस के अंदर सामूहिक दुष्कर्म, महिला प्रोफेसर से छेड़खानी, मेडिकल छात्र पर जानलेवा हमला, तेलुगु प्रोफेसर पर हमला और हत्या का प्रयास, बिरला के छात्रों पर हमला—इन सभी घटनाओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा रणनीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
ताजा मामला 21 फरवरी 2026 का है, जब बिरला छात्र रोशन मिश्रा पर अंधाधुंध फायरिंग की गई। यह घटना वर्तमान चीफ प्रॉक्टर संदीप पोखरियाल के कार्यकाल में हुई। परिसर के भीतर रहने और वर्षों से विश्वविद्यालय से जुड़े होने के बावजूद सुरक्षा में इस तरह की चूक बड़ा सवाल खड़ा करती है। इससे पहले भी छात्र पर हमले की घटनाएं हो चुकी थीं, ऐसे में सतर्कता बढ़ाई जानी चाहिए थी। सुरक्षा कार्यालय से प्राप्त एक आरटीआई के जवाब में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2019 से 2023 के बीच परिसर में 271 चोरी और 13 छेड़खानी के मामले दर्ज किए गए। ये तो सिर्फ दर्ज मामलों के आंकड़े हैं, जबकि कई घटनाएं शिकायत तक नहीं पहुंच पातीं।
इतनी बड़ी सुरक्षा बजट राशि खर्च होने के बावजूद लगातार अपराध होना विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न है। छात्रों और अभिभावकों में भय का माहौल है। सवाल यह है कि देश की शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले इस विश्वविद्यालय में आखिर सुरक्षा व्यवस्था कब मजबूत होगी ? क्या हर बड़ी घटना के बाद सिर्फ बैठकें और आश्वासन ही मिलेंगे, या जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई भी होगी ? बीएचयू परिसर में बढ़ती आपराधिक घटनाएं अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहीं, बल्कि संस्थान की साख और छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुकी हैं।
सोशल एक्टिविस्ट अनीशा चटर्जी ने बीएचयू परिसर में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि 2018 से अब तक हत्या, फायरिंग, दुष्कर्म, छेड़खानी और सैकड़ों चोरी की घटनाएं यह साबित करती हैं कि सुरक्षा व्यवस्था कागजों तक सीमित है। हाल ही में 21 फरवरी 2026 को बिरला हॉस्टल के सामने चली गोलियों की घटना ने छात्रों में दहशत बढ़ा दी है। अनीशा ने कहा कि आरटीआई में 2019 से 2023 के बीच 271 चोरी और 13 छेड़खानी के मामलों का खुलासा हुआ है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही तय करने, कैंपस में प्रभावी पेट्रोलिंग, सीसीटीवी निगरानी और बाहरी तत्वों की एंट्री पर सख्ती की मांग की। उनका कहना है कि सिर्फ बैठकों और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई जरूरी है।
