वाराणसी (रणभेरी): महाशिवरात्रि के समापन के साथ ही काशी में फागुन की रंगत और गहरी हो गई है। होली से पहले ही शहर के घाटों पर उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है। रविवार को नमो घाट पर स्थानीय लोगों ने लोकगीतों और जोगीरा की धुनों के साथ होली के आगमन का उल्लासपूर्ण स्वागत किया।
रंगभरी एकादशी से पूर्व ही गंगा किनारे फागुनी फिजा छा गई है। घाटों पर जुटे लोगों ने “होली खेले मसाने में” जैसे पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण संगीत और उमंग से सराबोर हो उठा। ढोलक और मंजीरे की थाप पर लोग थिरकते नजर आए।
कार्यक्रम से जुड़े आयोजक राजेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि काशी में होली का उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि यह एक लंबी लोक परंपरा का हिस्सा है। यहां लोग गंगा तट पर एकत्र होकर फाग गीत गाते हैं और आपसी भाईचारे के साथ पर्व का आनंद लेते हैं।
घाटों पर रंग-गुलाल के साथ भंग और ठंडाई का भी दौर चलता दिखा। युवा और बुजुर्ग सभी इस उत्सव में समान रूप से शामिल रहे। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को और जीवंत बना दिया।
फिलहाल, काशी के घाटों पर फागुन की खुमारी छाई हुई है और जैसे-जैसे होली नजदीक आ रही है, उत्सव का रंग और भी गहराता जा रहा है।
