पैन का खेल, बैंक में 25 करोड़ का फर्जी लोन! UPSC छात्र बना साइबर ठगी का शिकार

पैन का खेल, बैंक में 25 करोड़ का फर्जी लोन! UPSC छात्र बना साइबर ठगी का शिकार

वाराणसी (रणभेरी): साइबर ठगों ने एक यूपीएससी अभ्यर्थी के बैंक खाते का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का फर्जी लोन दिखाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित छात्र के मुताबिक उसके बचत खाते को बिना जानकारी करंट अकाउंट में बदलकर करीब 25.59 करोड़ रुपये का “नेगेटिव लियन” दर्ज कर दिया गया। मामले में साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

पीड़ित छात्र मूल रूप से वाराणसी का रहने वाला है और वर्तमान में लखनऊ में रहकर यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। छात्र ने बताया कि जनवरी में वह नई दिल्ली गया हुआ था। 17 जनवरी को करोल बाग स्थित लाइब्रेरी की फीस ऑनलाइन जमा करने के दौरान भुगतान बार-बार असफल हो गया। इसके बाद जब उसने मोबाइल बैंकिंग से अपना खाता देखा तो खाते में लगभग 25 करोड़ 56 लाख रुपये का नेगेटिव लियन दिखाई दिया।

बैंक शाखा और जीएसटी कार्यालय के चक्कर

छात्र ने तुरंत ग्राहक सेवा से संपर्क किया, जिसके बाद उसे बैंक शाखा जाने की सलाह दी गई। 19 जनवरी को हजरतगंज स्थित ICICI Bank की शाखा पहुंचने पर उसे जीएसटी कार्यालय भेजा गया। वहां अधिकारियों ने बताया कि उसके पैन कार्ड का दुरुपयोग कर वाराणसी में एक करंट अकाउंट खोला गया और फर्जी फर्म के नाम पर भारी राशि का लोन लिया गया है।

जांच में सामने आया कि “उत्तरा इंटरप्राइजेज” नाम से एक कंपनी दिखाकर यह वित्तीय लेन-देन किया गया। छात्र और उसके परिवार का कहना है कि उन्होंने कभी कोई कंपनी नहीं खोली और न ही करंट अकाउंट के लिए आवेदन किया।

साइबर थाने में मुकदमा दर्ज

पीड़ित के पिता ने 13 फरवरी को वाराणसी साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। तहरीर में बैंक की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।

क्या होता है नेगेटिव लियन

आम तौर पर नेगेटिव लियन बैंकिंग में उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी खाते या संपत्ति पर बैंक का वित्तीय दावा दर्ज हो जाता है, जिससे खाते से सामान्य लेन-देन प्रभावित हो सकता है। इस मामले में साइबर ठगों ने इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर खाते में भारी देनदारी दर्शा दी।

पुलिस और बैंकिंग एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि छात्र के पैन और खाते की जानकारी किस तरह हासिल की गई और इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल है।

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