वाराणसी (रणभेरी): नमो घाट पर नाव संचालन को लेकर निषाद समुदाय के दो गुटों राजघाट और सराय मोहना—के बीच चल रहा विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले तीन से चार महीनों से दोनों पक्षों के बीच फेज-1 और फेज-2 में संचालन के अधिकार को लेकर खींचतान जारी है, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।
प्रशासनिक स्तर पर कई बार बैठकें आयोजित की गईं। हाल ही में एडीसीपी, एडीएम सिटी और एसीपी दशाश्वमेध की मौजूदगी में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अंतिम फैसला आने तक नमो घाट के दोनों फेज पर कोई भी पक्ष नाव नहीं चलाएगा और न ही घाट पर नावें खड़ी करेगा।
हालांकि, इस निर्णय के पालन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सराय मोहना पक्ष का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपनी नावें हटा ली हैं, जबकि आरोप है कि राजघाट के कुछ नाविक अब भी फेज-1 पर संचालन कर रहे हैं।

सराय मोहना के प्रतिनिधि महेंद्र साहनी के अनुसार, इस विवाद का असर करीब 500 परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी आजीविका पूरी तरह नाव संचालन पर निर्भर है। उनका कहना है कि आदेश का पालन करने के चलते वे काम से वंचित हो गए हैं, जबकि दूसरे पक्ष के लोग नियमों की अनदेखी कर काम कर रहे हैं।

पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में कमिश्नर और स्थानीय थाना में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही वीडियो और फोटो साक्ष्य भी सौंपे गए हैं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और जल्द समाधान की मांग की है, ताकि सभी नाविकों को समान अवसर मिल सके और उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित रह सके।निषाद समुदाय से जुड़े संगठन के पदाधिकारियों ने भी मामले के शीघ्र निस्तारण की आवश्यकता पर जोर दिया है, जिससे बढ़ते तनाव को रोका जा सके।
