वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी में शिक्षा व्यवस्था के सवाल पर एक बार फिर शहर की सरज़मीं ने आवाज़ बुलंद की। बुधवार को शास्त्री घाट जनचिंतन का केंद्र बन गया, जब उच्च शिक्षा में सुधार और छात्रहित की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस आंदोलन की अगुवाई अपना दल (कमेरावादी) ने की, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र-युवा मंचों और आम नागरिकों ने भी भागीदारी की।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े निर्णय अब फाइलों में नहीं, ज़मीन की ज़रूरतों के मुताबिक होने चाहिए। उनका कहना था कि शिक्षा नीति और नियमन केवल कागज़ी ढांचे तक सीमित न रहकर छात्र-हित के ठोस उपाय बनें।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग University Grants Commission द्वारा प्रस्तावित यूजीसी क्रेडिट रेगुलेशन 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने की रही। वक्ताओं ने तर्क दिया कि यह विनियमन लागू होने पर छात्रों को शैक्षणिक क्रेडिट ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी, पढ़ाई में लचीलापन बढ़ेगा और संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत होगा।
आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि बदलते वैश्विक शैक्षणिक परिदृश्य में ऐसी क्रेडिट प्रणाली समय की मांग है। इससे विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम चयन में स्वतंत्रता मिलेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर उठी यह आवाज़ अब प्रशासन और नीति-निर्माताओं की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रही है।
