वाराणसी (रणभेरी): Banaras Hindu University में शुक्रवार देर रात विद्वत परिषद की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। करीब पांच घंटे तक चली इस बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, चिकित्सा और प्रशासनिक विकास से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार-विमर्श कर उन्हें मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति Ajit Kumar Chaturvedi ने की, जबकि संचालन कुलसचिव Arun Kumar Singh ने किया। यह बैठक विश्वविद्यालय के महामना सभागार में आयोजित हुई।

बैठक में चिकित्सा विज्ञान संस्थान से जुड़े अधिकांश प्रस्तावों को स्वीकृति मिल गई। परिषद ने क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस विभाग के शुरू होने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर और त्वरित इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही सुपर स्पेशियलिटी विभागों में डीएम, एमडी और एमसीएच जैसे उन्नत चिकित्सा पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव पर भी परिषद ने सहमति जताई।
परिषद की बैठक में चिकित्सा विज्ञान संस्थान में क्लीनिकल ट्रायल यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। इस यूनिट के माध्यम से नई दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विश्वविद्यालय में चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और नई चिकित्सा पद्धतियों के विकास में मदद मिलेगी।

इसके अलावा आयुर्वेद संकाय के पाठ्यक्रमों को National Commission for Indian System of Medicine के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संशोधित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। विद्यार्थियों के प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए संरचित इंटर्नशिप कार्यक्रम लागू करने का निर्णय भी बैठक में लिया गया।
बैठक के दौरान चिकित्सा विज्ञान संस्थान में नए विभागों की स्थापना, नए पाठ्यक्रम शुरू करने और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों को विस्तार देने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। इसके साथ ही पूर्णकालिक पीएचडी शोधार्थियों को अंशकालिक पीएचडी में परिवर्तित करने से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।

विद्वत परिषद के समक्ष शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रवेश की वर्तमान स्थिति, शोध कार्य की दिशा और आगामी योजनाओं की जानकारी दी गई। परिषद के सदस्यों ने भविष्य में नए शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने के संबंध में भी अपने सुझाव रखे।
