गोद लिया गांव ही उजाड़ने जा रही है सरकार : संजय सिंह

गोद लिया गांव ही उजाड़ने जा रही है सरकार : संजय सिंह
  • आंदोलन के बीच डोमरी पहुंचे सांसद संजय सिंह, किसानों के दर्द से हुए रूबरू
  • बोले – फर्जी विकास के नाम पर सरकार लिख रही बर्बादी की इबारत
  • यह लड़ाई सड़क से संसद तक जाएगी, किसानों के हक से समझौता नहीं : संजय सिंह

वाराणसी (रणभेरी): आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए “रोज़गार दो, सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा शुरू की है। इसी क्रम में शनिवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए आदर्श गांव डोमरी में किसानों के बीच सभा को संबोधित किया। पटेल चबूतरा पर आयोजित सभा में संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस गांव को प्रधानमंत्री ने गोद लिया, उसी गांव को उजाड़ने की तैयारी है।

गोद लिया गांव ही उजाड़ने जा रही है सरकार : संजय सिंह

डोमरी के लोगों को गांव खाली करने के नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई गोद लिया गांव ऐसे उजाड़ता है? संजय सिंह ने कहा कि सरकार बड़े उद्योगपतियों के 16 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर रही है, जबकि किसान कर्ज के बोझ तले आत्महत्या को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर किसानों की जमीन छीनी जा रही है और उसे कौड़ियों के भाव उद्योगपतियों को सौंपा जा रहा है। सांसद ने किसानों के साथ न्याय के लिए संघर्ष जारी रखने का भरोसा दिलाया।

उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। किसानों के बीच आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संजय सिंह ने कहा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि प्रधानमंत्री द्वारा गोद लिए गए गांव में ही किसानों को अपनी जमीन बचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि “फर्जी विकास के नाम पर यहां बर्बादी की इबारत लिखी जा रही है।” संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार विकास का ढोल पीटकर गरीब और मेहनतकश किसानों से उनकी जमीन छीनने की तैयारी कर रही है।

सांसद संजय सिंह ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई सिर्फ गांव तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि डोमरी के किसानों की इस समस्या को वह राज्यसभा में पूरी मजबूती के साथ उठाएंगे। सिंह ने स्पष्ट किया कि जब तक किसानों को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह मुद्दा संसद से सड़क तक गूंजता रहेगा।

उन्होंने किसानों से एकजुट और संगठित रहने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि किसानों के हक, सम्मान और भविष्य की है। संजय सिंह ने कहा कि यदि किसान मजबूती से खड़े रहे, तो किसी भी सरकार की हिम्मत नहीं होगी कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर सके। डोमरी गांव में बढ़ते इस आंदोलन ने एक बार फिर विकास बनाम किसान के सवाल को केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाती है और प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव के किसानों को न्याय मिलता है या नहीं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चुनाव जीतने के बाद गोद लिए गए डोमरी गांव में इन दिनों गहरी बेचैनी और आक्रोश का माहौल है। जिस गांव को विकास की मॉडल तस्वीर के तौर पर देश के सामने पेश किया गया था, वहीं अब सैकड़ों किसान अपनी जमीन और आजीविका को लेकर भयभीत हैं। गांव के करीब 400 किसानों का आरोप है कि सरकार उनकी लगभग 250 एकड़ कृषि भूमि पर कब्जा करने की तैयारी में है।

किसानों का कहना है कि विकास के नाम पर उनकी पुश्तैनी जमीन छीनी जा रही है, जबकि आज तक उन्हें न तो स्पष्ट योजना बताई गई है और न ही किसी तरह का भरोसेमंद मुआवजा। किसानों के अनुसार, जिस गांव को आदर्श बनाने के दावे किए गए थे, वहां अब खेती-किसानी ही खतरे में डाल दी गई है। इससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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