यूपी बोर्ड की कॉपियों का आज से मूल्यांकन शुरू, 250 केंद्रों पर 1.53 लाख कार्मिक तैनात

यूपी बोर्ड की कॉपियों का आज से मूल्यांकन शुरू, 250 केंद्रों पर 1.53 लाख कार्मिक तैनात

वाराणसी (रणभेरी): उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बुधवार से प्रदेश भर के 250 केंद्रों पर शुरू हो गया। परिषद ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं। यह कार्य 18 मार्च से शुरू होकर 1 अप्रैल तक चलेगा।

परिषद के सचिव भगवती सिंह के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए सभी केंद्रों पर आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। प्रदेश के 75 संकलन केंद्रों से उत्तर पुस्तिकाएं संबंधित मूल्यांकन केंद्रों तक भेज दी गई हैं। साथ ही मंगलवार को इस कार्य में लगाए गए शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया।

मूल्यांकन कार्य के संचालन के लिए 75 मुख्य नियंत्रक और 250 उप नियंत्रकों की नियुक्ति की गई है। हाईस्कूल की कॉपियों की जांच के लिए 117 केंद्र बनाए गए हैं, जबकि इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के लिए 111 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा 22 ऐसे केंद्र भी हैं, जहां दोनों कक्षाओं की कॉपियों की जांच की जाएगी।

हाईस्कूल स्तर की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में करीब 4300 अंकेक्षक, 8550 उप-प्रधान परीक्षक और लगभग 83,800 परीक्षक लगाए गए हैं। वहीं इंटरमीडिएट की कॉपियों के लिए करीब 2590 अंकेक्षक, 5300 उप-प्रधान परीक्षक और करीब 48,990 परीक्षकों की तैनाती की गई है।

पहली बार सॉफ्टवेयर से नियुक्त हुए अंकेक्षक

इस बार परिषद ने मूल्यांकन प्रक्रिया को और सटीक बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। पहली बार सॉफ्टवेयर के माध्यम से 6980 अंकेक्षकों की नियुक्ति की गई है। इनमें ज्यादातर प्रधानाचार्य और वरिष्ठ शिक्षक शामिल हैं, जिन्हें उनकी वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। अंकेक्षक मूल्यांकन के बाद लगभग 15 प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाओं का यादृच्छिक परीक्षण करेंगे, ताकि अंक देने या अंक जोड़ने में किसी प्रकार की गलती न रह जाए।

पहले यह जिम्मेदारी मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रकों के पास होती थी, लेकिन पूर्व में सामने आई तकनीकी और अंक गणना से जुड़ी त्रुटियों को देखते हुए परिषद ने इस व्यवस्था में बदलाव किया है। परिषद का मानना है कि नई प्रणाली से मूल्यांकन की गुणवत्ता बेहतर होगी और छात्रों को अधिक पारदर्शी एवं त्रुटिरहित परिणाम मिल सकेंगे।

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