वाराणसी (रणभेरी): विश्व प्रसिद्ध संकटमोचन संगीत समारोह के दूसरे दिन मंगलवार की शाम संगीत और आध्यात्म का अद्भुत मेल देखने को मिला। कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से ऐसा वातावरण रचा, जिसमें श्रोता पूरी तरह भक्ति और सुरों में डूबते नजर आए।
शाम की प्रमुख प्रस्तुति पद्मश्री शिवमणि की रही, जिन्होंने अपने अनोखे अंदाज से मंच को जीवंत कर दिया। पारंपरिक ड्रम सेट के साथ उन्होंने बाल्टी, शंख, घंट-घड़ियाल और अन्य सामान्य वस्तुओं को भी वाद्य यंत्र के रूप में इस्तेमाल कर लय का अनूठा प्रयोग प्रस्तुत किया। उनकी हर ताल पर दर्शक मंत्रमुग्ध होकर तालियां बजाते रहे।
इस दौरान मेंडोलिन वादक यू. राजेश ने सुरों की मधुरता से प्रस्तुति को और आकर्षक बना दिया, जबकि उनके शिष्य प्रियेश पाठक ने भी संगत की। कार्यक्रम में विश्वंभर नाथ मिश्र ने पखावज पर साथ देकर माहौल को और ऊंचाई प्रदान की।

प्रस्तुति के दौरान ‘रघुपति राघव राजा राम’ और ‘अच्युतम केशवम’ जैसे भजनों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। समापन शंखनाद के साथ हुआ, लेकिन उसकी गूंज देर तक लोगों के मन में बनी रही।
इस वर्ष के आयोजन में कुल 45 प्रस्तुतियां निर्धारित हैं, जिनमें पद्म पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों के साथ-साथ नए और अनुभवी कलाकार भी भाग ले रहे हैं। करीब 150 कलाकारों की सहभागिता वाले इस महोत्सव में विभिन्न समुदायों के कलाकार शामिल होकर सांस्कृतिक एकता का संदेश दे रहे हैं।
आगामी प्रस्तुतियों में विश्वमोहन भट्ट और सलिल भट्ट की मोहन वीणा और सात्विक वीणा की जुगलबंदी विशेष आकर्षण रहेगी। इसके अलावा तबला, सितार और गायन की कई प्रस्तुतियां भी श्रोताओं को सुनने को मिलेंगी।
कार्यक्रम में पहुंचे कलाकार गुलाम अब्बास खान ने काशी की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्रस्तुति देना हर कलाकार के लिए विशेष अनुभव होता है। उनके अनुसार, इस मंच पर गाना एक अलग ऊर्जा और संतोष प्रदान करता है।

समारोह के अंतर्गत कला दीर्घा और साहित्य मंच पर भी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिनमें काशी की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा रहा है। कुल मिलाकर यह आयोजन न केवल संगीत का मंच है, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और एकता का प्रतीक बनकर उभर रहा है।
