मजबूरी में सड़क बनी सीवर लाइन, अफसर-जनप्रतिनिधि पास, समाधान गायब
पांच साल से बहता गंदा पानी, स्थानीय लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी (रणभेरी): काशी–प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-19 पर स्थित राजातालाब क्षेत्र इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। तहसील और ब्लॉक मुख्यालय के बेहद समीप हाईवे की सर्विस लेन पर गंदे पानी का लगातार बहाव और जगह-जगह जलजमाव देखकर कोई भी व्यक्ति पहली नजर में यही समझेगा कि हाल ही में यहां तेज बारिश हुई है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक गंभीर और चिंताजनक है। यह बरसाती पानी नहीं, बल्कि नाली के अभाव में आसपास के घरों और दुकानों से निकलने वाला सीवर और गंदा पानी है, जिसे मजबूरी में लोग सर्विस लेन पर बहाने को विवश हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब पांच वर्ष पहले राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के दौरान फोरलेन और सर्विस लेन के बीच केवल वर्षा जल निकासी के लिए एक नाला बनाया गया था। उस समय इस क्षेत्र के तेजी से हो रहे नगरीकरण और आबादी के दबाव को नजरअंदाज कर दिया गया। नतीजतन, घरेलू सीवर और गंदे पानी की निकासी के लिए आज तक कोई अलग नाला या समुचित व्यवस्था नहीं की गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि पूरी सर्विस लेन गंदगी, दुर्गंध और अवजल जमाव का स्थायी केंद्र बन गई है।

सर्विस लेन पर बहता गंदा पानी न केवल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, बदबू के कारण लोगों का घरों में रहना दूभर हो गया है और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार मंडरा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
स्थिति की विडंबना यह है कि यह पूरा क्षेत्र किसी दूर-दराज के गांव का नहीं, बल्कि तहसील और ब्लॉक मुख्यालय के निकट का है। इसके बावजूद यहां साफ-सफाई और जल निकासी की हालत बद से बदतर बनी हुई है। स्थानीय नागरिक इसे “चिराग तले अंधेरा” की संज्ञा दे रहे हैं।
कचनार ग्राम प्रधान उर्मिला देवी का कहना है कि कचनार गांव अब पूरी तरह नगरीकृत हो चुका है। यहां सब्जी मंडी, ओवरब्रिज चौराहा, अंडरपास और कई सार्वजनिक स्थान हैं, जहां रोजाना सैकड़ों लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में पूरे क्षेत्र की सफाई केवल एक सफाईकर्मी के भरोसे नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि इसी कारण गांव में कोई सफाईकर्मी टिकता नहीं है। यदि कोई आता भी है तो कुछ दिनों बाद काम के दबाव से बचने के लिए गायब हो जाता है।
ग्राम प्रधान के अनुसार, इस समस्या को लेकर एडीओ पंचायत से लेकर डीपीआरओ तक कई बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। ऐसा प्रतीत होता है कि सफाईकर्मियों पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। न तो उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है और न ही काम की निगरानी होती है।

पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राजकुमार गुप्ता ने प्रशासनिक उदासीनता पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षेत्र तहसील और ब्लॉक मुख्यालय वाला है। इतना ही नहीं, मात्र 100 मीटर की दूरी के भीतर ब्लॉक प्रमुख नगीना सिंह पटेल, पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह पटेल और पूर्व विधायक महेंद्र पटेल का निवास भी है। इसके बावजूद वर्षों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की नजरों के सामने यह स्थिति है, तो दूरस्थ इलाकों की हालत कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय निवासी चन्द्रशेखर पटेल, राजीव वर्मा, संतोष कुमार, विनय जायसवाल, अरविंद विश्वकर्मा, सोनू पटेल और बबलू पटेल ने एक स्वर में कहा कि यदि साफ-सफाई की व्यवस्था इसी तरह लचर बनी रहनी है, तो फिर सफाईकर्मियों की नियुक्ति का औचित्य ही क्या है। सरकार हर महीने वेतन के रूप में सफाई कर्मियों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर सफाई के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता।
लोगों का कहना है कि गंदा पानी सर्विस लेन पर बहने से आए दिन वाहन फिसलने की घटनाएं होती हैं। दोपहिया वाहन चालक खासतौर पर खतरे में रहते हैं। कई बार बच्चों और बुजुर्गों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। इसके बावजूद न तो संबंधित ग्राम पंचायत और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सीवर और गंदे पानी की निकासी के लिए अलग नाले का निर्माण कराया जाए, नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और सफाई कर्मियों की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अब आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, उन्हें धरातल पर ठोस कार्रवाई चाहिए। राजातालाब की यह तस्वीर न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि स्वच्छता और नगरीय विकास के दावों की भी पोल खोलती है। तहसील और ब्लॉक मुख्यालय के पास यदि यह हाल है, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन नहीं है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कब तक आंख मूंदे बैठे रहते हैं और कब इस गंभीर समस्या पर ठोस कदम उठाए जाते है।
