काशी विश्वनाथ धाम में सांस्कृतिक संध्या: मालिनी अवस्थी के भजनों से गूंजा धाम, सितार त्रिवेणी और भरतनाट्यम ने मोहा मन

काशी विश्वनाथ धाम में सांस्कृतिक संध्या: मालिनी अवस्थी के भजनों से गूंजा धाम, सितार त्रिवेणी और भरतनाट्यम ने मोहा मन

वाराणसी (रणभेरी): चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन काशी विश्वनाथ धाम में भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। शिवार्चनम् मंच पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया, जहां श्रद्धालु देर शाम तक भक्ति में लीन नजर आए।

कार्यक्रम का शुभारंभ लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने माँ भगवती और भगवान शिव का स्मरण करते हुए आयोजन की मंगलकामना की।

काशी विश्वनाथ धाम में सांस्कृतिक संध्या: मालिनी अवस्थी के भजनों से गूंजा धाम, सितार त्रिवेणी और भरतनाट्यम ने मोहा मन

सांस्कृतिक संध्या में मालिनी अवस्थी की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने माता जगदंबा के भजन से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिससे माहौल भक्तिमय हो उठा। इसके बाद ‘भोला भंडारी’ और ‘होली खेले मसाने में’ जैसे लोकप्रिय गीतों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

वहीं प्रख्यात नृत्यांगना रमा वैद्यनाथन ने भरतनाट्यम के माध्यम से देवी आराधना की प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसे खूब सराहना मिली। इसके अलावा पंडित शिवनाथ मिश्र, देवव्रत मिश्र और कृष्णा मिश्र की ‘सितार त्रिवेणी’ ने शास्त्रीय संगीत का मनमोहक समां बांध दिया।

काशी विश्वनाथ धाम में सांस्कृतिक संध्या: मालिनी अवस्थी के भजनों से गूंजा धाम, सितार त्रिवेणी और भरतनाट्यम ने मोहा मन

पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालु कलाकारों की प्रस्तुतियों में डूबे नजर आए। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और बाहर से आए दर्शनार्थियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। समापन पर सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। यह सांस्कृतिक संध्या नवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व को सशक्त करने के साथ-साथ वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई।

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