धार्मिक ग्रंथ को वोट बैंक साधने का औजार बनाने पर विद्वानों ने जताया तीखा विरोध
वाराणसी (रणभेरी) : काशी, जिसे ज्ञान और धर्म की नगरी माना जाता है, में पंचांग पर राजनीति की छाया गहरी हो गई है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता अजय चौरसिया द्वारा जारी पीडीए पंचांग में धार्मिक तिथियों के साथ दिवंगत नेताओं और मुस्लिम समुदाय की तस्वीरें शामिल की गईं। विद्वानों ने इसे सनातन परंपरा का अपमान बताया। सनातन रक्षक दल के पंडित अजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि मृतकों की तस्वीरें पंचांग में डालना धार्मिक दृष्टि से अनुचित है और इसे केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया।
पंचांग का शुद्ध स्वरूप सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की गणना पर आधारित वैदिक और वैज्ञानिक दस्तावेज है, जो धार्मिक पर्वों, व्रतों और विधियों का मार्गदर्शन करता है। इसका उद्देश्य सनातनी संस्कृति को संजोना और देश-विदेश में लोगों को मार्गदर्शन देना है। विद्वानों का कहना है कि पंचांग को राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा पर चोट है। इस विवाद ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धार्मिक परंपराओं को वोट बैंक की साधना के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। पंचांग, जो वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, उसे राजनीति के लिए इस्तेमाल करना न केवल परंपरा का अपमान है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक शान पर भी सीधा आघात है।
