वाराणसी (रणभेरी): काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रस्तावित 199 कनिष्ठ लिपिक पदों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय के दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारी परीक्षा स्थगित करने की मांग को लेकर कुलपति को पत्र सौंप चुके हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं और उनका नियमितीकरण लंबे समय से एक मुद्दा रहा है। हाल ही में प्रशासन ने तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए एक समिति का गठन किया, जिसे कर्मचारियों ने सकारात्मक कदम बताया।
इस बीच विश्वविद्यालय ने 7 अप्रैल 2026 को 199 कनिष्ठ लिपिक पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की और अप्रैल के अंतिम सप्ताह में लिखित परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया। इस कदम से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है।
कर्मचारियों की प्रमुख शिकायतें इस प्रकार हैं:
- वे वर्षों से संस्थान में कार्यरत हैं और अब उन्हें युवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी, जो उनके लिए चुनौतीपूर्ण है।
- नौकरी के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण वे पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते और परीक्षा की तैयारी कठिन हो जाती है।
- उनके अनुभव, निष्ठा और दीर्घकालीन योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
कर्मचारी संघ का कहना है कि प्रशासन को इस स्थिति का ध्यान रखते हुए भर्ती प्रक्रिया को स्थगित करना चाहिए, ताकि उनकी मांगों और अनुभव को उचित सम्मान मिल सके।
