वाराणसी (रणभेरी): मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर से मंदिर तोड़े जाने का दावा करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। आठ सेकंड के इस वीडियो को अकांक्षा सिंह रघुवंशी नामक अकाउंट से साझा किया गया है, जिसमें चलते हुए बुलडोजर के दृश्य हैं और बैकग्राउंड में यह कहा जाता सुनाई देता है कि “कॉरिडोर के विकास के नाम पर विनाश किया जा रहा है।”
पोस्ट में दावा किया गया है कि विकास परियोजनाओं की आड़ में मंदिरों और पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को भ्रामक बताया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर स्पष्ट किया कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर को नहीं गिराया गया है। उन्होंने बताया कि यहां बनने वाले अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण कार्य एक अलग एजेंसी द्वारा किया जा रहा है और घाट पर मौजूद सभी मंदिरों का ध्वस्तीकरण नहीं, बल्कि सौंदर्यीकरण प्रस्तावित है।
अधिकारी के अनुसार, यह पूरा कार्य महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए सुविधाओं को आधुनिक बनाना है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
पुनर्विकास योजना के तहत घाट पर आधारभूत ढांचे में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। इसमें दो सामुदायिक शौचालयों के साथ हरित क्षेत्र विकसित किया जाएगा। भूतल का कुल क्षेत्रफल 29,350 वर्ग फीट होगा, जिसमें 12,250 वर्ग फीट का दाह संस्कार क्षेत्र शामिल है। प्रथम तल का क्षेत्रफल 20,200 वर्ग फीट निर्धारित किया गया है।
घाट पर 32 शवदाह प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे और प्रदूषण नियंत्रण के लिए आधुनिक, धुआं रहित चिमनियों की व्यवस्था की जा रही है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अलग विजिटर मार्ग तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, भूतल पर पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण क्षेत्र और सामुदायिक प्रतीक्षा कक्ष जैसी सुविधाएं भी विकसित होंगी। आसपास के क्षेत्र का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
सीएसआर फंड से हो रहा निर्माण
इस परियोजना पर लगभग 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो कोलकाता स्थित रूपा फाउंडेशन के सीएसआर फंड से वहन किए जा रहे हैं। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई 2023 को किया था। निर्माण में चुनार के बलुआ पत्थर और जयपुर के गुलाबी पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया है, जिससे लोगों में भ्रम फैल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना का उद्देश्य धार्मिक आस्था को क्षति पहुंचाना नहीं, बल्कि घाट की गरिमा को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से युक्त करना है।
