वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी रही। मंगलवार को प्रशासन द्वारा चिन्हित की गई लगभग 30 दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया। इस दौरान कुछ व्यापारियों ने विरोध जताया, जबकि कुछ ने न्याय के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि यह कार्रवाई एकतरफा है। उनका कहना है कि दालमंडी में अधिकतर दुकानें मुस्लिम समुदाय से जुड़ी हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। एक व्यापारी शमशाद ने कहा कि सरकार, जिसका नेतृत्व योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं, जानबूझकर मुस्लिम व्यापारियों को परेशान कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर ऐसी कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, परवेज हसन नामक एक अन्य दुकानदार ने कहा कि इस अभियान से लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि प्रशासन को पहले उचित मुआवजा देना चाहिए था। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी कि जनता समय आने पर प्रतिक्रिया देगी।

दरअसल, यह पूरी कार्रवाई दालमंडी मार्ग के चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना का शिलान्यास नरेंद्र मोदी ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान किया था। योजना के तहत करीब 650 मीटर लंबी सड़क को 60 फीट चौड़ा किया जाना है, जिसमें 30 फीट मुख्य मार्ग और दोनों ओर 15-15 फीट चौड़ी पटरी शामिल होगी।
प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना से काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। वर्तमान में यह इलाका संकरी गलियों और घनी आबादी के कारण भीड़भाड़ वाला है। सड़क चौड़ी होने से यातायात सुगम होगा और शहर के प्रमुख बाजार क्षेत्र में भी बेहतर व्यवस्था संभव हो सकेगी।
करीब 215 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना को वाराणसी के विकास के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि स्थानीय स्तर पर इसे लेकर असंतोष भी बना हुआ है।
