काशी में बसंत पंचमी पर बाबा विश्वनाथ के विवाह अनुष्ठानों का शुभारंभ, तिलकोत्सव की तैयारियां तेज

काशी में बसंत पंचमी पर बाबा विश्वनाथ के विवाह अनुष्ठानों का शुभारंभ, तिलकोत्सव की तैयारियां तेज

वाराणसी (रणभेरी): देवाधिदेव महादेव की प्राचीन नगरी काशी में बसंत पंचमी के साथ ही बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव की तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। सदियों से चली आ रही लोकपरंपरा के अनुसार इस पावन तिथि पर बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा का तिलक किया जाता है। यह आयोजन काशीवासियों की सामूहिक आस्था और लोकाचार का प्रतीक माना जाता है, जिसमें पूरी काशी बाबा के सगुन में सहभागी बनती है।

परंपरा के मुताबिक, हर वर्ष बसंत पंचमी पर टेढ़ीनीम स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास पर विधि-विधान से तिलकोत्सव संपन्न कराया जाता है। इस लोकानुष्ठान को बाबा के विवाह उत्सव की औपचारिक शुरुआत माना जाता है, जो रंगभरी एकादशी तक निरंतर चलता है।

पहली बार बड़ी शीतला माता मंदिर परिवार को मिला दायित्व

इस वर्ष बसंत पंचमी (शुक्रवार) को तिलकोत्सव का विशेष महत्व है। पहली बार दशाश्वमेध स्थित सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के महंत परिवार की ओर से काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव कराया जाएगा। इसके साथ ही उन धार्मिक परंपराओं का भी शुभारंभ होगा, जो बाबा के विवाह से जुड़ी मानी जाती हैं।

सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के उपमहंत अवशेष पाण्डेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि काशी की परंपरा के अनुसार हर वर्ष किसी न किसी काशीवासी परिवार को यह सौभाग्य प्राप्त होता है। इसी क्रम में इस वर्ष उनके परिवार को बाबा के तिलकोत्सव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उन्होंने बताया कि गुरुवार को तिलकोत्सव से जुड़ी पूजन सामग्री बड़ी शीतला माता मंदिर से बांसफाटक स्थित धर्म निवास परिसर में स्थित श्रीयंत्र पीठम लाई जाएगी। शुक्रवार को सायंकाल शुभ मुहूर्त में यहीं से पारंपरिक तिलकोत्सव का आयोजन प्रारंभ होगा।

वैदिक अनुष्ठान और सप्तर्षि आरती से पूर्व होगा तिलक

शिवांजलि आयोजन समिति के संयोजक संजीव रत्न मिश्र के अनुसार, बसंत पंचमी के अवसर पर सायंकाल तिलकोत्सव से पूर्व टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा। इस दौरान 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया जाएगा।

शुभ लग्न के अनुसार विश्वनाथ मंदिर में होने वाली सप्तर्षि आरती से पहले बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव किया जाएगा। काशीवासी सामूहिक रूप से बाबा को तिलक अर्पित कर उनके विवाहोत्सव से जुड़े सगुन की शुरुआत करेंगे।

लोकमान्यता है कि बसंत पंचमी से लेकर रंगभरी एकादशी तक बाबा विश्वनाथ विवाह भाव में विराजमान रहते हैं। रंगभरी एकादशी के दिन माता गौरा के साथ बाबा का गौना संपन्न होता है, जिसके साथ यह पावन परंपरा अपने चरम पर पहुंचती है।

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