वाराणसी (रणभेरी) : रंगभरी एकादशी के अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में मंदिर न्यास के दावों की पोल खुल गई। परिसर में मोबाइल फोन प्रतिबंध की सख्त चेतावनी के बावजूद वीआईपी श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और उनके समर्थक खुलेआम मोबाइल लेकर मंदिर में प्रवेश करते नजर आए। मंदिर प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में सैकड़ों लोगों ने न केवल मोबाइल अंदर पहुंचाया, बल्कि कैमरों के सामने खड़े होकर फोटो और सेल्फी भी लीं।
मंदिर न्यास की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में मोबाइल पूर्णतः प्रतिबंधित बताया गया था, लेकिन नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में व्यवस्था नाकाम रही। सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं और महिला नेत्रियों सहित कई लोगों ने खुलेआम नियमों की अनदेखी की। पूरे घटनाक्रम के दौरान निगरानी व्यवस्था भी निष्क्रिय दिखाई दी।

आम श्रद्धालुओं से सख्ती, वीआईपी को छूट
एक ओर जहां आम श्रद्धालुओं को प्रवेश द्वार पर कड़ी जांच और कर्मचारियों की सख्ती का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर प्रभावशाली लोगों को बिना रोक-टोक प्रवेश मिलता रहा। आरोप है कि कई लोग बिना समुचित जांच के गर्भगृह तक मोबाइल फोन लेकर पहुंच गए।
क्राउड मैनेजमेंट के दावे भी फेल
मंदिर प्रशासन द्वारा भीड़ प्रबंधन को लेकर किए गए दावे भी मौके पर खोखले साबित हुए। प्रवेश द्वारों पर तैनात गार्ड कई बार अपने निर्धारित प्वाइंट से हटे दिखे, जिससे अव्यवस्था की स्थिति बनी रही। परिसर में समुचित निगरानी और नियंत्रण का अभाव साफ नजर आया।
अफसरों की बैठक के बावजूद व्यवस्था ध्वस्त
रंगभरी एकादशी से पूर्व पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने एडिशनल सीपी, डीएम और मंडलायुक्त सहित अधिकारियों के साथ मंदिर परिसर का निरीक्षण कर विशेष गाइडलाइन जारी की थी। सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए प्वाइंट तय किए गए थे, लेकिन ऐन मौके पर व्यवस्थाएं चरमराती दिखीं।
जिम्मेदारी को लेकर बयानबाजी
घटना के बाद मंदिर न्यास और पुलिस के बीच जिम्मेदारी को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। मंदिर के एसडीएम शंभूशरण ने कहा कि मोबाइल लेकर प्रवेश करने वालों की पहचान कराई जा रही है। मंदिर न्यास की अपनी एसओपी है और पूरे प्रकरण की जानकारी सुरक्षा समिति को दे दी गई है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। रंगभरी एकादशी जैसे प्रमुख पर्व पर अव्यवस्था और नियमों की खुली अनदेखी ने मंदिर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
