वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी के घनी आबादी वाले दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई सोमवार को शुरू हो गई। नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम ने चिन्हित जर्जर मकानों पर ध्वस्तीकरण अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक एक ही दिन में 21 मकानों को गिराने की तैयारी है, जिसे इस इलाके में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
भारी पुलिस फोर्स और ड्रोन निगरानी के बीच कार्रवाई
कार्रवाई के मद्देनजर पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। चार थानों की पुलिस, महिला कर्मियों समेत करीब 500 पुलिसकर्मी मौके पर तैनात हैं। दालमंडी आने-जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और पूरे ऑपरेशन पर ड्रोन से निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध को नियंत्रित किया जा सके।

एसीपी दशाश्वमेध डॉ. अतुल अंजान के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत जर्जर भवनों को हटाना जरूरी है और इसी क्रम में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा है।
विरोध में उतरे दुकानदार, मोहलत की मांग
कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय दुकानदार और मकान मालिक विरोध में उतर आए। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और अचानक कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। कई दुकानदार रोते हुए प्रशासन से कम से कम 10 दिन की मोहलत मांगते नजर आए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर उन्हें उजाड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि वे मुआवजे के भरोसे जीवन नहीं चला सकते और इस मामले को अदालत तक ले जाएंगे।
तनावपूर्ण मोड़: मकान मालिक ने पेट्रोल डालकर लगाई आग
अभियान के दौरान उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए जब मकान संख्या 40/71 के मालिक ने विरोध में घर के अंदर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और खुद को जलाने की धमकी देने लगा। मौके पर मौजूद पुलिस और स्थानीय लोगों ने उसे समझाने की कोशिश की। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले 21 जनवरी को भी इसी इलाके में 8 मकानों को गिराया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी।
23 मकान घोषित जर्जर, नोटिस जारी
नगर निगम ने हाल ही में 23 मकानों को सौ साल से अधिक पुराना और जर्जर बताते हुए नोटिस जारी किया था। नोटिस में इन भवनों को तीन दिन के भीतर खाली करने को कहा गया था। अधिकारियों का कहना है कि इन मकानों में रहना लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है।
बढ़ता टकराव, कानूनी लड़ाई की तैयारी
कार्रवाई के बीच प्रशासन और स्थानीय व्यापारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। जहां प्रशासन इसे विकास और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, वहीं प्रभावित लोग इसे अपने अस्तित्व और रोजगार पर संकट बता रहे हैं। अब मामला अदालत तक पहुंचने की तैयारी में है, जिससे आने वाले दिनों में विवाद और गहराने के आसार हैं।
