पुलिस की सुस्ती से डर के साए में जीने को मजबूर एक मां

पुलिस की सुस्ती से डर के साए में जीने को मजबूर एक मां
  • रामघाट में बदमाशों ने की थी फायरिंग, मां ने सीपी से गुहार लगाते हुए मांगी सुरक्षा
  • घर पर फायरिंग कर बदमाशों ने दी ‘तेरही की पूड़ी’ खिलाने की धमकी, दहशत में परिवार
  • आधी रात को गूंजी थी गोलियों की तड़तड़ाहट, नाली में मिला था खोखा

वाराणसी (रणभेरी): वाराणसी में बदमाशों का हौसला किस कदर बुलंद है कि इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बेखौफ बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की और पुलिस आज तक बदमाशों को नहीं गिरफ्तार कर सकी। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत रामघाट इलाके का है जहां बीते 7 मार्च की रात हुई अंधाधुंध फायरिंग की घटना ने एक बार फिर पुलिसिया इकबाल पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पीड़ित परिवार दहशत के साये में जीने को मजबूर है। घटना की मुख्य गवाह और पीड़ित गोविंद यादव की मां सुमन यादव ने अब न्याय की उम्मीद में पुलिस कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है। अपने अधिवक्ता विशाल के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंची सुमन यादव ने प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और अपने इकलौते बेटे की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

मां का आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है, जबकि अपराधी खुलेआम सोशल मीडिया पर मौत का फरमान सुना रहे हैं। मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए सुमन यादव ने बताया कि 7 मार्च 2026 की रात करीब 1 बजकर 38 मिनट पर जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया था, तभी उनके घर के नीचे बाइक सवार हमलावरों ने धावा बोल दिया। आरोपियों में मुख्य रूप से दशाश्वमेध क्षेत्र के रहने वाले आर्यन पांडेय, गोलू यादव उर्फ शुभम, आंचल यादव उर्फ आनंद, विशाल साहनी और शंभु साहनी शामिल थे। इन लोगों ने घर के बाहर खड़े होकर पहले तो गोविंद यादव के नाम की अभद्र गालियां दीं और फिर जान से मारने की नीयत से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

गोलीबारी की आवाज सुनकर परिवार के लोग सहम गए और अपनी जान बचाने के लिए घर के अंदर दुबक गए। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवार के अनुसार, फायरिंग करने के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए, लेकिन भागते समय वे ‘शंभु भैया’ का नाम लेकर चिल्ला रहे थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस पूरी साजिश के पीछे शंभु साहनी का मुख्य हाथ है।
हैरत की बात यह है कि इस पूरी वारदात का जीवंत प्रमाण पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है, जिसमें हमलावरों को साफ तौर पर देखा जा सकता है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मौके से बरामद खोखे के आधार पर कोतवाली थाने में मुकदमा अपराध संख्या 0056/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109, 352, 351(3) और 191(2) के तहत केस तो दर्ज कर लिया है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

सुमन यादव का कहना है कि उन्होंने पुलिस को नाली में गिरा हुआ गोली का खोखा भी सौंपा था, जो इस हमले का सबसे बड़ा सबूत है, फिर भी आरोपियों को पकड़ने के बजाय प्रशासन ढिलाई बरत रहा है। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपी अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर गोविंद को धमका रहे हैं। इंस्टाग्राम पर भेजे गए एक संदेश में अपराधियों ने लिखा है कि “बच गए वरना तुम्हारे यहां लोग तेरही की पूड़ी खाते।” इस तरह की धमकियों ने परिवार की रातों की नींद उड़ा दी है।

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता विशाल ने इस मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर कटाक्ष किया है। उन्होंने हाल ही में उदय प्रताप (यूपी) कॉलेज में हुई हिंसक घटना का हवाला देते हुए कहा कि यदि कॉलेज प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम उठाए होते, तो इतनी बड़ी अनहोनी को टाला जा सकता था। ठीक उसी तरह, रामघाट की इस घटना में भी यदि पुलिस जल्द एक्शन नहीं लेती है, तो गोविंद यादव की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। अधिवक्ता ने जोर देकर कहा कि गोविंद अपने परिवार का इकलौता चिराग है और वर्तमान में वह डर के मारे घर के भीतर कैद रहने को विवश है। उसे डर है कि यदि वह बाहर निकला, तो घात लगाए बैठे अपराधी उसे अपनी गोली का निशाना बना लेंगे। अधिवक्ता ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि मुकदमे में उचित धाराओं की वृद्धि की जाए, क्योंकि आरोपियों ने न केवल हमला किया बल्कि फिरौती की मांग भी की थी, जिसका उल्लेख शुरुआती एफआईआर में सही ढंग से नहीं हो सका है।

सुमन यादव ने पुलिस कमिश्नर के समक्ष अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वह एक मां हैं और अपने बेटे की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि अपराधी न केवल उनके बेटे को बल्कि पूरे परिवार को आए दिन भद्दी-भद्दी गालियां दे रहे हैं। आरोपियों का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि वे पुलिस की मौजूदगी के बावजूद बेखौफ होकर ऑनलाइन सक्रिय हैं और अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। सुमन का आरोप है कि स्थानीय पुलिस की सुस्त जांच के कारण आरोपियों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके द्वारा दिए गए बयानों के साथ भी छेड़छाड़ की जा सकती है, इसलिए उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की पारदर्शी विवेचना सुनिश्चित करने और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने की पुरजोर अपील की है। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हैं कि क्या खाकी वर्दी उन रसूखदार अपराधियों पर शिकंजा कस पाएगी या फिर एक पीड़ित मां की पुकार फाइलों के बीच ही दबकर रह जाएगी।

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