विदेश दौरे पर भी नहीं बदलेगा अंदाज़: भगवा पहनावे में सिंगापुर-जापान जाएंगे सीएम योगी

विदेश दौरे पर भी नहीं बदलेगा अंदाज़: भगवा पहनावे में सिंगापुर-जापान जाएंगे सीएम योगी

(रणभेरी): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के प्रस्तावित सिंगापुर और जापान दौरे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर दौरे का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेश आकर्षित करना और औद्योगिक सहयोग बढ़ाना बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के पारंपरिक भगवा पहनावे को लेकर बहस छिड़ी हुई है।

भगवा वेशभूषा में ही विदेश यात्रा

मुख्यमंत्री इस बार भी अपने पारंपरिक भगवा कुर्ता-चोला में ही विदेश यात्रा पर जाएंगे। देश के सरकारी कार्यक्रमों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक वे प्रायः इसी वेशभूषा में नजर आते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह उनकी व्यक्तिगत, धार्मिक और वैचारिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। समर्थकों के अनुसार, यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है, जिसे वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना गर्व की बात है। वहीं विपक्ष इसे प्रतीकात्मक राजनीति करार दे रहा है।

जापान में हनुमान मंदिर के दर्शन

सूत्रों के अनुसार, जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री एक हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे। बताया जा रहा है कि यह मंदिर राजधानी Tokyo से लगभग 40–50 किलोमीटर दूर स्थित है। इस कार्यक्रम को सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सैंडल की जगह औपचारिक जूते

सीएम के फुटवियर को लेकर भी चर्चा है। सामान्यतः वे सैंडल पहनते हैं, लेकिन इस विदेश दौरे के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और मौसम को देखते हुए औपचारिक जूते पहन सकते हैं।

22 फरवरी को सिंगापुर रवाना

सीएम कार्यालय के अनुसार, 22 फरवरी को मुख्यमंत्री सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। 23 व 24 फरवरी को सिंगापुर में और 25 व 26 फरवरी को जापान में विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इस दौरान निवेशकों के साथ बैठकें, औद्योगिक संगोष्ठियां और द्विपक्षीय वार्ताएं आयोजित की जाएंगी। दौरे का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना, औद्योगिक विकास को गति देना और वैश्विक कंपनियों को प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति ने पारंपरिक परिधान में विदेश यात्रा की हो, लेकिन ऐसा कम ही देखने को मिलता है। ऐसे में यह दौरा केवल निवेश ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान के दृष्टिकोण से भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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